मध्य पूर्व एक बार फिर युद्ध की दहलीज पर खड़ा है। इजराइल और ईरान के बीच गहराते तनाव ने शुक्रवार की रात एक नया मोड़ ले लिया, जब ईरान ने 65 मिनट तक इजराइल पर मिसाइलें बरसाईं। तेल अवीव और यरूशलम को निशाना बनाते हुए, ईरान ने करीब 200 बैलिस्टिक मिसाइलें तीन चरणों में दागीं।
सूत्रों के मुताबिक, इजराइल के रक्षा मंत्रालय और रणनीतिक केंद्र, जहां प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सैन्य बैठकों की अध्यक्षता करते हैं, मुख्य लक्ष्यों में शामिल थे।
यरूशलम-तेल अवीव में दहशत का माहौल
इन हमलों के दौरान इजराइल के प्रमुख शहरों में जोरदार धमाकों की गूंज सुनाई दी। आसमान में विस्फोटों की चमक और ज़मीन पर इमारतों का हिलना—इन दृश्यों ने नागरिकों में भय का माहौल पैदा कर दिया। तेल अवीव के एक अस्पताल में 15 से अधिक घायल नागरिकों का इलाज चल रहा है।
अमेरिका ने फिर निभाई ढाल की भूमिका
एक अमेरिकी अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने इजराइल की मदद करते हुए ईरानी मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय किया। यह अमेरिकी सैन्य सक्रियता दर्शाती है कि यह अब केवल दो देशों का नहीं, बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय टकराव बन चुका है।
खामेनेई की चेतावनी और जवाबी कसम
हमले से कुछ घंटे पहले ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि इजराइल को “सुरक्षित बचने नहीं दिया जाएगा।” उन्होंने बदला लेने की कसम खाई थी — और उनका बयान अब वास्तविकता में तब्दील हो चुका है।
इजराइल ने हमलों की जिम्मेदारी ली, अगला कदम तय
इजराइली सेना ने दावा किया कि ईरान के नतांज और इस्फ़हान न्यूक्लियर सेंटर, रडार बेस और एयर डिफेंस सिस्टम्स को निशाना बनाया गया।
मोसाद ने ऑपरेशन की रणनीति पहले से तय कर रखी थी, और रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोटक ड्रोन और गाइडेड हथियार पहले ही ईरान में तैनात कर दिए गए थे।
युद्ध का ब्लूप्रिंट: ऑपरेशन महीनों से तैयार
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने पुष्टि की कि यह ऑपरेशन नवंबर से योजनाबद्ध था, लेकिन इसे अप्रैल में स्थगित किया गया था। अब यह ऑपरेशन कम से कम दो हफ्तों तक चल सकता है, हालांकि इसकी कोई अंतिम समयसीमा तय नहीं है।
ईरान को बड़ा झटका: शीर्ष सैन्य नेता मारे गए
इस हमले में जनरल मोहम्मद बाघेरी, जनरल होसैन सलामी और जनरल आमिर अली हाजीज़ादेह सहित तीन उच्चस्तरीय सैन्य अधिकारी मारे गए।
अली खामेनेई ने इन मौतों की पुष्टि करते हुए कहा कि यह एक गहरा आघात है, लेकिन ईरान इस लड़ाई से पीछे नहीं हटेगा।
ड्रोन युद्ध की शुरुआत और जवाबी तैयारी
ईरान ने इजराइल पर 150 से अधिक ड्रोन भी भेजे, जिन्हें इजराइली सेना ने सीमा के बाहर ही रोकने का दावा किया। सेना ने कहा कि पूरे देश में रिजर्व सैनिकों की तैनाती कर दी गई है, और किसी भी संभावित जवाबी हमले के लिए पूरी तैयारी है।
UN सुरक्षा परिषद में शिकायत, ट्रंप ने दी चेतावनी
ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को एक आपात बैठक के लिए पत्र लिखा, जिसमें इजराइल के हमले को “राज्य प्रायोजित आतंकवाद” बताया।
इस बीच, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान से अमेरिका के साथ परमाणु समझौते पर लौटने की अपील की। उन्होंने चेताया कि “अगर ईरान ने जल्द समझौता नहीं किया, तो उसका अस्तित्व संकट में आ सकता है।”
निष्कर्ष: पूरी दुनिया की सांसें थमीं
ईरान और इजराइल के बीच यह सीधा संघर्ष अब केवल सीमा विवाद नहीं रहा। यह भू-राजनीतिक युद्ध में बदल चुका है — जिसमें परमाणु खतरे, ड्रोन वार, और राजनीतिक गठजोड़ सभी शामिल हो गए हैं। अगला कदम किसका होगा, और क्या यह युद्ध टल सकता है? इस सवाल का जवाब आने वाले कुछ घंटों में पूरी दुनिया तलाश रही है।
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