वॉशिंगटन/कनाडा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से हलचल मचा दी है। इस बार उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा और कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को निशाने पर लेते हुए कहा कि रूस को G8 से बाहर निकालना एक ऐतिहासिक भूल थी। ट्रंप का कहना है कि अगर रूस को शामिल रखा गया होता, तो आज दुनिया यूक्रेन संकट जैसी स्थिति में न होती।
“मैं होता तो युद्ध नहीं होता” – ट्रंप का दावा
ट्रंप ने कहा:
“G7 पहले G8 हुआ करता था। लेकिन करीब 9 साल पहले रूस को बाहर कर दिया गया, जो मेरे मुताबिक एक भारी रणनीतिक गलती थी। उस समय ओबामा और ट्रूडो ने रूस को अलग-थलग कर दिया। अगर उस वक्त मैं राष्ट्रपति होता, तो आज हम युद्ध जैसी स्थिति का सामना नहीं कर रहे होते।”
पुतिन को G8 से बाहर करना ‘अपमानजनक’ था – ट्रंप
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को G8 से बाहर करना उनके लिए एक बड़ा अपमान था।
“पुतिन मुझसे बात करते हैं, लेकिन वो अब किसी और से बात नहीं करना चाहते। जब उन्हें बाहर निकाला गया, तो उन्होंने इसे व्यक्तिगत अपमान माना। किसी के भी साथ ऐसा होता तो वही प्रतिक्रिया होती।”
G7 को G9 बनाने का सुझाव
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि केवल रूस ही नहीं, बल्कि चीन को भी इस मंच में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा:
“अगर कोई चाहता है कि चीन को शामिल किया जाए, तो मुझे कोई दिक्कत नहीं। हमें बातचीत के लिए सभी महत्वपूर्ण देशों को एक ही मंच पर लाना चाहिए।”
क्रीमिया संकट से लेकर यूक्रेन युद्ध तक की जड़ में वही गलती?
ट्रंप का मानना है कि 2014 में रूस द्वारा क्रीमिया पर कब्जा किए जाने के बाद उसे G8 से बाहर करना ही एक ऐसा फैसला था, जिसने रूस को और अधिक अलग-थलग किया और इसका परिणाम 2022 के यूक्रेन युद्ध के रूप में सामने आया।
निष्कर्ष: ट्रंप का रुख स्पष्ट – संवाद हो, बहिष्कार नहीं
डोनाल्ड ट्रंप की इस टिप्पणी से यह साफ है कि वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रतिबंधों और बहिष्कार के बजाय प्रत्यक्ष संवाद और कूटनीति को प्राथमिकता देते हैं। उनका सुझाव कि G7 को G8 या G9 में बदला जाए, आने वाले समय में वैश्विक राजनीति में नई बहस को जन्म दे सकता है।
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