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IIT कानपुर का पहला दीक्षांत समारोह साल 1965 में एक साधारण टेंट में हुआ था। उस दिन भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन मुख्य अतिथि थे और उन्होंने छात्रों को डिग्रियां दी थीं।
पहले बैच में कुल 66 छात्रों को B.Tech की डिग्री मिली थी। इनमें 8 छात्र केमिकल, 6 सिविल, 15 इलेक्ट्रिकल, 23 मैकेनिकल और 14 मेटालर्जिकल इंजीनियरिंग से थे। साथ ही 5 छात्रों को Ph.D. की डिग्री भी दी गई थी।
इस पहली B.Tech डिग्री का पुरस्कार अभय कुमार भूषण को मिला था। वे 1960-65 के बैच के छात्र थे और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में पढ़े थे। अभय कुमार भूषण ने आगे चलकर इंटरनेट के लिए महत्वपूर्ण File Transfer Protocol (FTP) को डिजाइन किया और अमेरिका में तकनीकी क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया।
इस समारोह की अध्यक्षता IIT कानपुर के पहले निदेशक डॉ. पीके केलकर ने की थी। उन्होंने युवाओं को देश के विकास में योगदान देने का संदेश दिया।
IIT कानपुर की शुरुआत 1959 में कानपुर के हरकोर्ट बटलर टेक्नोलॉजिकल इंस्टिट्यूट (HBTI) के एक कमरे से हुई थी। 1963 तक संस्थान अपने बड़े परिसर में शिफ्ट हो गया।
अब IIT कानपुर देश और दुनिया में तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में अग्रणी संस्थान बन चुका है। जल्द ही इसका 58वां दीक्षांत समारोह होगा, जिसमें RBI के गवर्नर संजय मल्होत्रा, जो खुद IIT कानपुर के पूर्व छात्र हैं, मुख्य भाषण देंगे। यह समारोह उस लंबी और गौरवशाली यात्रा को याद दिलाएगा जो एक छोटे से टेंट से शुरू होकर विश्व स्तर पर पहुंची है।
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