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सीहोर (मध्यप्रदेश): प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। महाराष्ट्र में कथा के दौरान भगवान चित्रगुप्त को लेकर की गई उनकी टिप्पणी के विरोध में कायस्थ समाज ने बड़ा प्रदर्शन किया। समाज के लोगों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा, पुतला दहन किया और एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।
‘वृंदावन जाकर नाक रगड़कर माफी मांगें’
प्रदर्शन के दौरान समाज के लोगों ने कहा कि, “पं. प्रदीप मिश्रा को वृंदावन जाकर नाक रगड़कर माफी मांगनी चाहिए, जैसे उन्होंने पहले राधा रानी से मांगी थी।” समाज ने मांग की कि वे चित्रगुप्त पीठ जाकर क्षमा याचना करें।
समाज में बढ़ा आक्रोश
शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदीप मिश्रा ने मंदसौर में महिलाओं और राधा रानी पर भी आपत्तिजनक बातें कहीं थीं। उनकी हालिया माफी में भी वे यह साबित करना चाहते हैं कि जो वे कहते हैं, वो वेद-पुराण से है, लेकिन कई लोग उसे समझ नहीं पाते। इससे समाज में और ज्यादा गुस्सा बढ़ गया है।
‘गलत संदेश फैला रहे हैं’
जिला अध्यक्ष प्रदीप सक्सेना ने कहा कि उन्होंने खुद 11 बार शिवमहापुराण पढ़ी है, लेकिन ऐसी कोई बात कहीं नहीं लिखी है जैसी पं. मिश्रा ने कही। उन्होंने चेताया कि इतने बड़े श्रोताओं के सामने गलत बात कहने से समाज में भ्रम फैलता है।
देशभर में विरोध की तैयारी
दिल्ली, पटना, जयपुर समेत देश के अन्य शहरों में भी पंडित प्रदीप मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया चल रही है।
इसी बीच मिला सम्मान
विवादों के बीच पंडित प्रदीप मिश्रा को “दुनिया के सबसे ज्यादा टीआरपी वाले आध्यात्मिक वक्ता” का सम्मान मिला है, जो उन्हें ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की टीम ने दिया।
कायस्थ समाज की मांग है कि पंडित मिश्रा सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और भविष्य में इस तरह की आपत्तिजनक टिप्पणियों से बचें।
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