नई दिल्ली/ओटावा: भारत को एक अहम कूटनीतिक सफलता मिली है। कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS (Canadian Security Intelligence Service) ने अपनी हालिया रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि भारत विरोधी खालिस्तानी तत्व कनाडा की धरती से भारत में हिंसा और आतंक फैलाने की साजिशें रच रहे हैं।
🔍 CSIS रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
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1980 के दशक से सक्रियता:
रिपोर्ट में कहा गया है कि खालिस्तानी आंदोलन से जुड़े उग्रवादी लंबे समय से कनाडा में सक्रिय हैं।
वे पंजाब को अलग खालिस्तान राष्ट्र बनाने के लक्ष्य से प्रेरित होकर हिंसक गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश कर रहे हैं। -
कनाडा बना ‘प्लानिंग हब’:
रिपोर्ट के मुताबिक, ये गुट कनाडा की धरती पर बैठकर फंड इकट्ठा करने, हमलों की योजना बनाने और उग्रवाद को बढ़ावा देने में जुटे हैं। -
कनाडा की सुरक्षा पर भी खतरा:
CSIS का मानना है कि ये गतिविधियाँ न केवल भारत की सुरक्षा को चुनौती देती हैं, बल्कि कनाडा की आंतरिक शांति और सामाजिक ढांचे के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
🛑 ‘उग्रवादी’ कहे गए खालिस्तानी गुट
इस रिपोर्ट की खास बात यह है कि कनाडा सरकार ने पहली बार इन खालिस्तानी संगठनों को “उग्रवादी (extremist)” करार दिया है।
अब तक कनाडाई प्रशासन इस मुद्दे पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाता था, लेकिन यह रिपोर्ट बताती है कि देश की सुरक्षा एजेंसियाँ अब इसे एक गंभीर खतरे के तौर पर देख रही हैं।
🧨 पृष्ठभूमि: ट्रूडो के आरोप और भारत की प्रतिक्रिया
2023 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने एक सनसनीखेज दावा किया था कि खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत की भूमिका है।
भारत ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें बेतुका और अस्वीकार्य बताया था। साथ ही यह भी कहा गया था कि कनाडा भारत विरोधी तत्वों को संरक्षण दे रहा है।
🧭 निष्कर्ष:
CSIS की यह रिपोर्ट भारत और कनाडा के संबंधों में एक नई पारदर्शिता की शुरुआत हो सकती है। भारत के लिए यह एक कूटनीतिक जीत मानी जा रही है, क्योंकि अब कनाडा की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसी ने भी मान लिया है कि खालिस्तानी उग्रवाद एक वास्तविक और साझा खतरा है।
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