इस्लामाबाद | 20 जून 2025
ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते युद्ध के बीच पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति असमंजस और मतभेदों से भरी हुई है। एक ओर जहां पाकिस्तानी सरकार खुलकर इज़रायली कार्रवाई की आलोचना कर रही है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना – विशेषकर सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर – ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है।
इस असमंजस को और गहरा कर दिया अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान ने, जिसमें उन्होंने कहा कि “मुनीर इज़राइल के विरोधी नहीं हैं, बल्कि ईरान को दूसरों से बेहतर समझते हैं।”
ट्रंप-मुनीर मुलाकात के बाद और बढ़ी खाई
जनरल आसिम मुनीर की वाशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप के साथ हालिया मुलाकात के बाद यह साफ हो गया कि पाकिस्तान की सेना और सरकार के रुख में सुस्पष्ट अंतर है।
ट्रंप ने इस मुलाकात के बाद कहा:
“मुनीर ईरान को बखूबी समझते हैं। वे इस युद्ध से संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन इज़राइल विरोधी भी नहीं हैं। उन्होंने मेरी बात से सहमति जताई।”
मुनीर ने अब तक इस मुद्दे पर कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया है, जिससे उनकी स्थिति और अधिक अस्पष्ट हो गई है।
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय की सख्त प्रतिक्रिया
इसके विपरीत, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने ईरान पर इज़रायल के हमलों की तीखी आलोचना की है।
प्रवक्ता शफकत अली खान ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा:
“हम ईरान को नैतिक समर्थन देते हैं और उसके खिलाफ की गई किसी भी सैन्य आक्रामकता की निंदा करते हैं।”
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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने ईरान के खिलाफ इज़रायली कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के खिलाफ बताया है।
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पाकिस्तान ने इज़राइल से तत्काल हमले रोकने की मांग की और बातचीत के ज़रिए हल निकालने का समर्थन दोहराया।
ईरान ने नहीं मांगी पाकिस्तान से सैन्य मदद
हालांकि पाकिस्तान ने ईरान को समर्थन देने की बात कही है, लेकिन विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि:
“अब तक ईरान ने हमसे किसी भी तरह की सैन्य सहायता का अनुरोध नहीं किया है।”
इसके साथ ही पाकिस्तान ने यह भी कहा कि ईरान को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा का पूरा अधिकार है।
डार की कूटनीतिक सक्रियता
पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने हाल के दिनों में:
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ईरान, तुर्की, मिस्र, यूएई और ब्रिटेन के विदेश मंत्रियों से बात की,
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और इस क्षेत्रीय संकट के संभावित गंभीर प्रभावों की ओर ध्यान दिलाया।
उन्होंने विशेष रूप से ईरानी परमाणु ठिकानों पर इज़रायली हमलों को IAEA सुरक्षा प्रोटोकॉल और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताया।
राजनीतिक विश्लेषण: अंदरूनी फूट या रणनीतिक चुप्पी?
पाकिस्तान की आंतरिक स्थिति इस समय रणनीतिक असहजता की ओर इशारा करती है:
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सरकार अंतरराष्ट्रीय मंच पर सक्रिय और मुखर है,
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जबकि सेना, विशेष रूप से उसका सबसे प्रभावशाली चेहरा, सावधानी बरतते हुए चुप्पी साधे हुए है।
यह चुप्पी कुछ विश्लेषकों के अनुसार अमेरिकी दबाव या क्षेत्रीय संतुलन साधने की कूटनीति भी हो सकती है।
निष्कर्ष: पाकिस्तान की एकता पर सवाल
ईरान और इज़राइल के युद्ध ने पाकिस्तान के भीतर नीतिगत मतभेदों को उजागर कर दिया है।
एक ओर लोकतांत्रिक सरकार खुले तौर पर ईरान के पक्ष में खड़ी है,
वहीं दूसरी ओर सेना एक संतुलन साधने की कोशिश में चुप है, जिससे भारत, अमेरिका और खाड़ी देशों को भी संकेत मिल रहे हैं।
यह देखना अहम होगा कि अगर संघर्ष और गहराता है, तो पाकिस्तान किस ओर झुकता है — तटस्थता, साझेदारी या सैन्य समर्थन?
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