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Iran-Israel War Ceasefire: किन शर्तों पर थमी जंग? ट्रंप की पहल से कैसे बनी बात?

तेहरान/यरूशलम/वॉशिंगटन, 24 जून 2025 – ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन से जारी युद्ध में आखिरकार एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सीधी पहल और कूटनीतिक दखल के बाद दोनों देशों के बीच सीजफायर की घोषणा हुई। लेकिन सवाल यह है कि किस शर्त पर यह युद्ध विराम हुआ? और क्या दोनों पक्ष वास्तव में इस पर अमल करने को तैयार हैं?


🕊️ ट्रंप की सीधी कूटनीति: “बीबी को फोन लगाओ”

व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोमवार को सीधे इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू (बीबी) से बात की और कहा:

🗣️ “हम शांति लाने जा रहे हैं, अब बीबी को कॉल करो।”

वहीं, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और मध्य-पूर्व मामलों के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने ईरान से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष बातचीत की।


🇮🇷 ईरान की सहमति: अगर हमला नहीं हुआ, तो हम भी पीछे हटेंगे

ईरान की तरफ से इशारा दिया गया कि अगर इजरायल नए हमले नहीं करता, तो वह भी अपनी सैन्य कार्रवाई रोक सकता है। यही शर्त सीजफायर की नींव बनी।

हालांकि, शुरुआत में दोनों देशों ने ट्रंप के बयान के कुछ ही घंटे बाद नए हमलों की चेतावनी भी दी थी, जिससे इस युद्धविराम की स्थिति काफी अस्थिर लग रही थी।


💣 बमबारी और जवाबी कार्रवाई के बाद संवाद

  • शनिवार रात अमेरिकी B-2 बमवर्षकों ने ईरान की भूमिगत परमाणु साइट्स पर हमला किया।

  • रविवार रात, ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी एयरबेस पर मिसाइल दागे, जिनमें कोई जानमाल का नुकसान नहीं हुआ।

  • इसके तुरंत बाद ट्रंप ने दोनों पक्षों से संपर्क साधा और सीधे मध्यस्थता की कमान संभाली


🔄 यूरेनियम संवर्धन पर अटकी थी बात

वार्ता पहले भी कई बार हुई थी, लेकिन ईरान की मांग थी कि वह यूरेनियम संवर्धन बंद नहीं करेगा। यही शर्त ट्रंप प्रशासन को मंजूर नहीं थी, जिससे पहले की वार्ताएं टूट गई थीं।


✅ सीजफायर की शर्तें क्या थीं?

  1. इजरायल की शर्त: ईरान कोई नया हमला न करे।

  2. ईरान का संकेत: अगर इजरायल हमला नहीं करेगा, तो वह भी कार्रवाई रोक देगा।

  3. अमेरिका की भूमिका: सीधे नेतन्याहू और तेहरान के अधिकारियों से संपर्क करके दोनों को सहमत कराना।


📢 क्या ट्रंप की बात मान गया ईरान और इजरायल?

तकनीकी रूप से, हाँ। ट्रंप की पहल के बाद दोनों पक्षों ने हमले रोक दिए, और 24 घंटे के अंदर शांति बनाए रखने पर सहमति बनी। यह ट्रंप के लिए बड़ी कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है, खासकर तब जब वे खुद को “शांति दूत” के रूप में पेश करना चाहते हैं।


🤔 लेकिन क्या यह स्थायी है?

हालांकि फिलहाल हमला रुक गया है, लेकिन सीजफायर अभी अनिश्चित स्थिति में है। ईरान और इजरायल दोनों ने चेतावनी दी है कि यदि शर्तें तोड़ी गईं, तो युद्ध फिर से शुरू हो सकता है।


📝 निष्कर्ष:

ट्रंप की पहल पर हुआ यह सीजफायर निश्चित रूप से एक डिप्लोमैटिक ब्रेकथ्रू है, लेकिन स्थायी शांति के लिए दोनों देशों की पारस्परिक सहमति और विश्वास बेहद जरूरी होगा। आने वाले कुछ घंटे और दिन इस बात का फैसला करेंगे कि क्या वाकई मिडिल ईस्ट को राहत मिलेगी या नहीं।

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