रायपुर:
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर में आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ पर आयोजित संविधान हत्या दिवस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और कहा कि लोकतंत्र को मजबूत रखने के लिए जन-जागरूकता और जनता की भागीदारी बहुत जरूरी है।
🗓 आपातकाल का काला दिन याद किया
मुख्यमंत्री ने कहा कि 25 जून 1975 का दिन लोकतंत्र की हत्या का दिन था। यह सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि उनके लिए व्यक्तिगत पीड़ा का अनुभव है। उन्होंने बताया कि उनके बड़े पिताजी नरहरि प्रसाद साय 19 महीने तक जेल में रहे थे। उस समय कई लोकतंत्र सेनानियों के परिवारों को भुखमरी तक का सामना करना पड़ा।
🧑🎓 युवाओं को संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को आपातकाल का इतिहास जानना चाहिए, ताकि वे लोकतंत्र की कीमत समझ सकें। उन्होंने छात्रों और युवाओं से अपील की कि वे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सजग रहें।
🏅 लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान
मुख्यमंत्री ने इस मौके पर लोकतंत्र सेनानी परिवारों को शॉल, श्रीफल और प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार इन परिवारों को प्रति माह 10,000 से 25,000 रुपये की सम्मान राशि दे रही है।
🏛 विधानसभा अध्यक्ष रमन सिंह का बयान
डॉ. रमन सिंह ने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र पर एक बदनुमा दाग है। उस दौर में लाखों लोगों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के जेल में डाल दिया गया था। उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे इस दौर के बारे में पढ़ें और शोध करें, ताकि लोकतंत्र की रक्षा के लिए हमेशा जागरूक रहें।
🖼 विशेष प्रदर्शनी का अवलोकन
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने आपातकाल पर आधारित प्रदर्शनी का निरीक्षण किया। इस प्रदर्शनी में मानवाधिकार उल्लंघन और दमन की घटनाएं चित्रों और दस्तावेजों के माध्यम से दर्शाई गई थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस तरह की प्रदर्शनी नई पीढ़ी को सच्चा संदेश देती है।
👥 प्रमुख लोग रहे मौजूद
इस कार्यक्रम में उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, कई विधायक, लोकतंत्र सेनानी, छात्र-छात्राएं और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
कार्यक्रम का मकसद था लोगों को यह समझाना कि लोकतंत्र की रक्षा सिर्फ सरकार का नहीं, हर नागरिक का कर्तव्य है। इतिहास से सीख लेकर हमें अपने संविधान और स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हमेशा सतर्क रहना चाहिए।
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