इस्लामाबाद:
पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर ने उस सैन्य अधिकारी के अंतिम संस्कार में हिस्सा लिया, जिसकी पहचान 2019 में भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान को पकड़ने वाले अधिकारी के रूप में सामने आई है।
यह अधिकारी, मेजर सैयद मोइज़ अब्बास शाह, दक्षिण वज़ीरिस्तान के सरारोगा क्षेत्र में तालिबान आतंकियों के साथ मुठभेड़ में मारे गए।
📍 मेजर शाह की अंतिम यात्रा में सैन्य सम्मान
37 वर्षीय मेजर शाह को रावलपिंडी स्थित उनके पैतृक स्थान चकलाला गैरीसन में पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।
पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा ISPR ने बताया कि जनरल मुनीर ने शाह को “वीरता, बलिदान और देशभक्ति की मिसाल” बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।
एक वायरल हो रही तस्वीर में देखा जा सकता है कि सेना प्रमुख अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ जनाज़े में शामिल हुए।
🛑 अभिनंदन से जुड़ा पुराना वीडियो वायरल
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मुठभेड़ में मृत्यु के बाद सामने आया कि मेजर शाह वही अधिकारी थे जिन्होंने 27 फरवरी 2019 को विंग कमांडर अभिनंदन वर्थमान को पकड़ा था और उन्हें भीड़ से बचाया था।
एक पुराना वीडियो क्लिप जिसमें वह Geo TV को इंटरव्यू दे रहे थे, फिर से वायरल हो गया है। उस वक्त शाह कैप्टन के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने बताया था कि उन्होंने अभिनंदन को पकड़ने के बाद कैसे भीड़ से दूर ले जाकर उनकी जान बचाई।
🔫 तालिबान के खिलाफ अभियान में शहीद
ISPR के अनुसार, मेजर शाह उस अभियान में मारे गए जिसमें पाकिस्तानी सेना ने Tehrik-e-Taliban Pakistan (TTP) से मुठभेड़ की। इस ऑपरेशन में 11 आतंकियों को मार गिराया गया और 7 घायल हुए।
इस मुठभेड़ में एक और जवान लांस नायक जिब्रान उल्लाह (27) भी शहीद हुआ।
⚠️ TTP: पाकिस्तान का आतंरिक खतरा
TTP यानी पाकिस्तान तालिबान, 2007 में कई आतंकवादी गुटों के गठबंधन के रूप में बना था। इसका मकसद पाकिस्तान में कट्टर इस्लामी शासन लागू करना है।
TTP पर कई बड़े आतंकी हमलों का आरोप है, जिनमें 2008 में इस्लामाबाद के मैरियट होटल पर हमला और 2009 में सेना मुख्यालय पर हमले शामिल हैं।
यह संगठन अल-कायदा के काफी नज़दीक माना जाता है।
🔚 निष्कर्ष:
मेजर मोइज़ अब्बास शाह की मौत पाकिस्तान के लिए एक सैन्य क्षति है, लेकिन भारत के परिप्रेक्ष्य में यह घटना 2019 की एक महत्वपूर्ण स्मृति को फिर से जीवित करती है।
जिस अधिकारी ने अभिनंदन को गिरफ्तार किया और भीड़ से बचाया, वही अब आतंक के खिलाफ लड़ते हुए मारा गया—यह बताता है कि पाकिस्तान के भीतर आतंरिक संकट किस स्तर पर पहुंच चुका है।
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