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बूंदी। राजस्थान के धनेश्वर रॉयल्टी नाके पर ‘लाल पर्ची’ के जरिए ओवरलोड ट्रकों को पास किया जा रहा है, जिससे सरकार को हर दिन लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। यह खेल खनिज विभाग की नजरों के सामने चल रहा है, लेकिन कार्रवाई नहीं हो रही है।
क्या है ‘लाल पर्ची’ का खेल?
धनेश्वर टोल नाके पर खनिज विभाग ने रॉयल्टी वसूली का ठेका एक निजी फर्म को दिया है। इस फर्म की जिम्मेदारी होती है कि वह वहां से गुजरने वाले वाहनों की जांच करे और अवैध या ओवरलोड ट्रकों को रोके, लेकिन हकीकत में ऐसा कुछ नहीं हो रहा।
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ओवरलोड ट्रकों को एक “लाल पर्ची” दी जाती है, जिसे दिखाकर वे आराम से निकल जाते हैं।
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इस पर्ची को अघोषित पास माना जा रहा है, जिससे ट्रक चालक बेधड़क सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
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ट्रकों की असली जांच के बजाय सिर्फ लाल पर्ची देखकर उन्हें रोकने की बजाय जाने दिया जाता है।
कितना नुकसान हो रहा है?
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नियम के अनुसार, अगर कोई ओवरलोड ट्रक पकड़ा जाए तो उस पर कम से कम 1.25 लाख रुपये का जुर्माना लगना चाहिए।
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लेकिन ठेकेदार फर्म हर ट्रक से सिर्फ 1800 से 2200 रुपये वसूल कर आगे बढ़ा देती है।
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इससे सरकार को हर दिन लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है।
सरकारी सिस्टम से हुआ खुलासा
परिवहन विभाग के सॉफ्टवेयर ने 288 ओवरलोड ट्रकों के चालान जनरेट किए हैं।
इनकी सूची खनिज विभाग को भेज दी गई है, जिससे इनके खिलाफ कार्रवाई हो सके।
क्या बोले अधिकारी?
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प्रादेशिक परिवहन अधिकारी मनीष शर्मा ने कहा कि अगर कोई ओवरलोड वाहन रॉयल्टी नाके से बिना अनुमति के गुजरता है, तो यह गंभीर मामला है। जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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खनिज अभियंता प्रशांत कुमार ने बताया कि चालान वाली सूची मिल गई है और जब तक जुर्माना अदा नहीं होता, तब तक खनिज कार्य की अनुमति नहीं दी जाएगी।
नतीजा
राज्य सरकार को इस “लाल पर्ची” के खेल से हर दिन करोड़ों का नुकसान हो रहा है और अधिकारियों की चुप्पी इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना रही है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह भ्रष्टाचार और भी गहराता जाएगा।
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