ढाका:
बांग्लादेश के कुमिल्ला ज़िले में एक 21 वर्षीय हिंदू महिला के साथ हुए जघन्य बलात्कार के बाद देशभर में आक्रोश फैल गया है। घटना का एक वीडियो — जिसमें पीड़िता निर्वस्त्र और बुरी तरह से पिटती दिखाई दे रही है — सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजधानी ढाका समेत कई शहरों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।
क्या है मामला?
यह भयावह घटना 26 जून को कुमिल्ला के मुरादनगर उपजिले में पीड़िता के मायके में घटी। बताया गया है कि उस समय महिला का पति, जो दुबई में काम करता है, त्योहार हरि सेवा के अवसर पर बच्चों समेत परिवार से मिलने आया हुआ था।
रात लगभग 10 बजे स्थानीय नेता फज़ोर अली ने कथित रूप से महिला के घर में घुसकर उसके साथ बलात्कार किया। घटना के बाद कुछ स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर पीटा, लेकिन उसे पुलिस को सौंपने के बजाय अस्पताल ले गए, जहाँ से वह कथित रूप से भाग निकला।
घटना सामने तब आई जब महिला का अमानवीय वीडियो सोशल मीडिया पर फैल गया, जिसमें वह अपने हमलावरों से रहम की गुहार लगाती दिखाई दी।
कार्रवाई और गिरफ्तारी
पुलिस अधीक्षक नाज़िर अहमद खान ने बताया कि मुख्य आरोपी 36 वर्षीय फज़ोर अली को ढाका के सईदाबाद इलाके में एक तड़के छापेमारी के दौरान गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, चार अन्य व्यक्तियों को भी गिरफ्तार किया गया है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर पीड़िता की तस्वीर और पहचान सार्वजनिक की थी।
कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि पुलिस ने कार्रवाई तब की जब वीडियो वायरल हुआ, जिससे प्रशासन की संवेदनशीलता पर सवाल उठे हैं।
देशभर में गुस्सा और छात्र आंदोलन
ढाका विश्वविद्यालय में छात्रों ने इस घटना के खिलाफ ज़ोरदार विरोध प्रदर्शन किया। जगन्नाथ हॉल, जो अल्पसंख्यक समुदाय के छात्रों के लिए आरक्षित है, के विद्यार्थियों ने भी न्याय की मांग करते हुए रैलियाँ निकालीं।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के महासचिव मिर्ज़ा फ़खरुल इस्लाम आलमगीर ने दोषियों के खिलाफ कड़ी सज़ा की मांग की।
उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप
घटना की गंभीरता को देखते हुए बांग्लादेश उच्च न्यायालय ने संबंधित एजेंसियों को सोशल मीडिया पर फैले वीडियो को तुरंत हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उसे समुचित चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
राजनीतिक माहौल और प्रशासन पर सवाल
पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के पुत्र सजीब वाजेद जॉय ने घटना पर नाराज़गी जताते हुए सोशल मीडिया पर प्रशासन की आलोचना की। उन्होंने मोहम्मद युनुस की अंतरिम सरकार पर कानून-व्यवस्था बिगड़ने का आरोप लगाया और कहा कि पिछले 11 महीनों में हिंसा, आतंक और बलात्कार की घटनाएं बढ़ी हैं।
उल्लेखनीय है कि अगस्त 2024 में जब शेख हसीना की सरकार एक जनआंदोलन के चलते सत्ता से हटाई गई थी, तो वह भारत भाग गईं। उसके बाद नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद युनुस ने अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में कार्यभार संभाला था।
हसीना सरकार के पतन के बाद अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे देश की सामाजिक स्थिरता पर गंभीर प्रश्न उठे हैं।
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