बर्लिन:
जर्मनी अब साइबर सुरक्षा को लेकर एक नई रणनीति पर काम कर रहा है। देश के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंड्ट ने रविवार को घोषणा की कि जर्मनी इज़रायल के साथ मिलकर एक साइबर रिसर्च सेंटर स्थापित करेगा। इस पहल का उद्देश्य दोनों देशों के बीच साइबर रक्षा सहयोग को मज़बूत करना है।
जर्मन अखबार ‘बिल्ड’ की रिपोर्ट के मुताबिक, डोब्रिंड्ट ने जर्मनी के लिए एक ‘Cyber Dome’ यानी साइबर डोम बनाने की पांच बिंदुओं वाली योजना साझा की है।
‘Cyber Dome’ क्या है?
‘साइबर डोम’ एक रणनीतिक साइबर सुरक्षा ढांचा है जो डिजिटल हमलों से बचाव के लिए इज़रायल के प्रसिद्ध ‘Iron Dome’ मॉडल पर आधारित है। जबकि आयरन डोम रॉकेट हमलों को रोकने के लिए है, साइबर डोम डिजिटल खतरों और हैकिंग से देश के महत्वपूर्ण ढांचे जैसे ऊर्जा, स्वास्थ्य, संचार और सुरक्षा प्रणालियों की रक्षा करेगा।
इस प्रणाली के तहत डेटा संग्रहण, खतरे की तुरंत पहचान, और समन्वित राष्ट्रीय प्रतिक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी।
जर्मनी की पांच-सूत्रीय योजना क्या है?
गृह मंत्री डोब्रिंड्ट ने इज़रायल के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए निम्नलिखित प्रस्ताव रखे हैं:
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BND (जर्मन खुफिया एजेंसी) और इज़रायली Mossad के बीच सहयोग बढ़ाना।
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जर्मन-इज़रायली साइबर सुरक्षा अनुसंधान केंद्र की स्थापना।
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साइबर रक्षा के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी और तकनीकी सहयोग।
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ड्रोन हमलों से सुरक्षा प्रणाली को उन्नत करना।
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सामान्य नागरिकों की सुरक्षा और अलर्ट सिस्टम को मजबूत बनाना — जैसे कि इज़रायल का रॉकेट चेतावनी सिस्टम।
पृष्ठभूमि: क्यों ज़रूरी हुआ ये सहयोग?
यह निर्णय उस भूमिका से प्रेरित है जो हाल ही में इज़रायल की साइबर क्षमताओं ने ईरान के बड़े साइबर हमलों को नाकाम करने में निभाई। ये हमले हालिया 12-दिवसीय युद्ध के दौरान हुए थे, जिसे अंततः अमेरिका की मध्यस्थता से विराम मिला।
जर्मन मंत्री डोब्रिंड्ट ने शनिवार को इज़रायल पहुंचकर बात याम में उस स्थान का दौरा किया जहाँ ईरानी मिसाइल हमले में 9 लोगों की मौत हो गई थी। इस दौरान उन्होंने इज़रायली विदेश मंत्री गिदेओन साअर के साथ खड़े होकर कहा:
“हमें इज़रायल के साथ अपना समर्थन और गहराई से बढ़ाना चाहिए।”
साइबर डोम क्यों है महत्वपूर्ण?
इज़रायल के नेशनल साइबर डायरेक्टरेट के अंतरराष्ट्रीय सहयोग प्रमुख अवीराम अट्ज़ाबा ने पहले कहा था कि साइबर डोम की विशेषता है:
“यह रॉकेट हमलों के खिलाफ आयरन डोम की तरह काम करता है, लेकिन साइबर जगत में।”
उन्होंने यह भी बताया कि यह प्रणाली विभिन्न स्रोतों से डेटा लेकर एक समग्र राष्ट्रीय साइबर प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है।
निष्कर्ष:
जर्मनी और इज़रायल का यह नया सहयोग वैश्विक साइबर खतरों के दौर में एक मजबूत और भविष्य-संवेदनशील पहल है। इससे न केवल डिजिटल सुरक्षा बल्कि सामरिक साझेदारी भी और अधिक मज़बूत होगी।
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