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उज्जैन, MP News: प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा घोटाला सामने आया है। उज्जैन जिले के तराना जनपद में भ्रष्टाचार की पोल एक वायरल ऑडियो ने खोल दी है। ऑडियो सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू हुई, जिसमें कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी पाया गया है।
जिला पंचायत उज्जैन की सीईओ जयति सिंह ने बताया कि माकड़ौन की सुचाई पंचायत में जांच कराई गई है। शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि तराना जनपद के कुछ अधिकारी और कर्मचारी आंशिक रूप से दोषी हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, और भी खुलासे हो सकते हैं।
💰 क्या था घोटाले का तरीका?
वायरल ऑडियो में बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों (हितग्राहियों) से 25 हजार रुपए तक वसूले जा रहे थे।
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10 हजार रुपए पंचायत स्तर पर
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15 हजार रुपए जनपद कार्यालय तक
ऑडियो में एक बाबू और मंत्री के बीच बातचीत भी सामने आई है, जिससे यह साफ हो गया कि इस भ्रष्टाचार का हिस्सा ऊपर तक जाता था।
😠 कर्मचारियों में मचा हड़कंप
ऑडियो सामने आने के बाद तराना जनपद कार्यालय में हलचल मच गई। कई कर्मचारियों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए और खुद को निर्दोष बताया। उनका कहना था कि वे केवल ऊपर से मिले आदेश का पालन कर रहे थे। वहीं जनपद की सीईओ डॉली श्रीवास्तव ने इस पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया है।
📝 पहले भी मिल चुकी हैं शिकायतें
यह घोटाला नया नहीं है। पहले भी ग्रामीण लोगों ने इस भ्रष्टाचार की शिकायत EOW (आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो) में की थी। अब EOW ने तराना जनपद को नोटिस भी दिया है।
स्थानीय सामाजिक संगठन और जनप्रतिनिधियों ने इस मामले की SIT या EOW से स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि गरीबों के हक की योजना में चोरी सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं, जन-विश्वास की हत्या है।
📌 आगे क्या होगा?
जिला पंचायत सीईओ जयति सिंह ने कहा है:
“तराना जनपद कार्यालय को नोटिस देकर शुरुआती जांच करवाई गई है। कुछ अधिकारी-कर्मचारी दोषी पाए गए हैं। अब आगे की जांच के लिए सक्षम अधिकारी को निर्देश दिए गए हैं। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।”
👉 यह मामला दिखाता है कि गरीबों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में पारदर्शिता और ईमानदारी कितनी जरूरी है। अब देखना होगा कि दोषियों के खिलाफ क्या कड़ी कार्रवाई होती है।
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