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लखनऊ।
किसान नेता राकेश टिकैत और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक की लखनऊ में हुई मुलाकात ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहे हैं। ऐसे में इसे सिर्फ शिष्टाचार नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति से भी जोड़ा जा रहा है।
🔹 क्या हुई चर्चा?
राकेश टिकैत ने डिप्टी सीएम के लखनऊ स्थित आवास पर जाकर उनसे मुलाकात की। दोनों नेताओं ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया। टिकैत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा:
“आज उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक जी से उनके आवास पर मिलकर कुशलक्षेम जाना और किसानों व जनहित से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।”
वहीं डिप्टी सीएम बृजेश पाठक ने भी यही बात दोहराई और इसे एक सामान्य मुलाकात कहा।
🔹 लेकिन क्या है इसके पीछे की सियासत?
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राकेश टिकैत पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं।
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वे किसान आंदोलन के प्रमुख चेहरा भी रहे, जिसने केंद्र सरकार को तीन कृषि कानून वापस लेने पर मजबूर कर दिया था।
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2022 के चुनाव से पहले टिकैत ने किसानों से बीजेपी को वोट न देने की अपील की थी, जिसका असर कुछ सीटों पर देखा गया।
अब, जब उन्होंने यूपी सरकार के बड़े नेता से मुलाकात की है, तो इसे बीजेपी की ‘मिलाप नीति’ और चुनावी तैयारी का हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि बीजेपी इस तरह के नेताओं से संबंध सुधारकर जाट और किसान समुदाय में अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
🔹 पहले भी की थी अहम मुलाकात
राकेश टिकैत इससे पहले यूपी के पूर्व डीजीपी प्रशांत कुमार से भी मुलाकात कर चुके हैं। अब डिप्टी सीएम से मुलाकात, यह दिखा रही है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं।
🔚 निष्कर्ष
भले ही इस मुलाकात को शिष्टाचार बताया गया हो, लेकिन चुनाव नजदीक आते ही हर कदम की राजनीतिक अहमियत होती है।
यह देखना दिलचस्प होगा कि राकेश टिकैत और बीजेपी के बीच यह नजदीकी बढ़ती है या नहीं, और इसका राजनीतिक फायदा किसे मिलता है – सरकार को या किसान आंदोलन की छवि को।
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