भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ ओवल टेस्ट में 6 रन से रोमांचक जीत दर्ज कर सीरीज़ को 2-2 की बराबरी पर खत्म किया। तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद सिराज के शानदार 9 विकेट और टीम इंडिया के जज़्बे ने यह मुकाबला भारत की झोली में डाल दिया। लेकिन मैच खत्म होने के बाद सबकी नज़रें एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी पर थीं – और यहीं से विवाद शुरू हुआ।
भारतीय फैंस के मन में एक बड़ा सवाल खड़ा हुआ – जब भारत ने 2024 में इंग्लैंड को अपने घर में 4-1 से हराया था, तो फिर अब ट्रॉफी भारत को क्यों नहीं दी गई?
2025 में खेली गई सीरीज़ को एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी का पहला आधिकारिक संस्करण माना गया है इसका मतलब है कि 2024 की 4-1 की जीत इस ट्रॉफी के लिए मान्य नहीं मानी गई। इसी वजह से जब 2025 की सीरीज़ 2-2 की बराबरी पर खत्म हुई, तो ट्रॉफी को साझा कर दिया गया।
पांचवां और आखिरी टेस्ट मैच लंदन के ओवल में खेला गया। जब लग रहा था कि इंग्लैंड मैच निकाल लेगा, तभी मोहम्मद सिराज ने अंग्रेज़ बल्लेबाज़ों की कमर तोड़ दी भारत ने आखिरी दिन इंग्लैंड को मात देकर मुकाबला 6 रन से जीत लिया। यह जीत भारतीय टीम के जज़्बे की मिसाल थी।
सिराज – 9 विकेट, प्लेयर ऑफ द मैच
शुभमन गिल और हैरी ब्रूक – प्लेयर ऑफ द सीरीज़
इस ट्रॉफी का नाम दो दिग्गजों – सचिन तेंदुलकर और जेम्स एंडरसन – के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में सबसे ज़्यादा मैच खेले हैं।
इंग्लैंड में – पटौदी ट्रॉफी
भारत में – एंथनी डी मेलो ट्रॉफी
लेकिन अब दोनों को हटाकर एक साझा ट्रॉफी – एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी बनाई गई है।
भारत का अगला इंग्लैंड दौरा 2029 में है। इसके पहले, 2027-29 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के दौरान एक सीरीज़ भारत में भी हो सकती है। तभी जाकर इस नई ट्रॉफी का कोई पक्का विजेता तय होगा। भारत ने 2024 में इंग्लैंड को 4-1 से हराया था, लेकिन वो जीत अब इस ट्रॉफी में गिनी नहीं गई। 2025 की सीरीज़ ड्रॉ होने के चलते एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी साझा कर दी गई। सिराज की अगुवाई में भारत ने आखिरी टेस्ट 6 रन से जीतकर सीरीज़ बराबर की।
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