हाल ही में खत्म हुई एंडरसन-तेंदुलकर ट्रॉफी में भारत और इंग्लैंड के बीच 5 टेस्ट मैचों की सीरीज 2-2 से ड्रॉ रही। इस सीरीज के दौरान कई यादगार पल देखने को मिले, लेकिन मैनचेस्टर टेस्ट में ऋषभ पंत का साहसिक प्रदर्शन सबसे खास रहा।
चौथे टेस्ट में पहले दिन रिवर्स स्वीप खेलते समय पंत के पैर में चोट लग गई थी। इसके बावजूद अगले दिन वह बल्लेबाजी करने उतरे। मैदान तक पहुंचने के लिए उन्हें सीढ़ियों की रेलिंग का सहारा लेना पड़ा, लेकिन उन्होंने टीम को मुश्किल स्थिति से बाहर निकालने के लिए हिम्मत नहीं हारी। पंत ने दर्द झेलते हुए शानदार अर्धशतक लगाया और भारत को मैच बचाने की उम्मीदें जिंदा रखीं।
भारतीय बल्लेबाज करुण नायर ने इस जज्बे की जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा, “ऋषभ ने खिलाड़ी होने के नाते बेहद ऊंचे मानक स्थापित किए हैं। उन्होंने टूटा हुआ पैर होने के बावजूद टीम के लिए बल्लेबाजी की और 50 रन बनाए। ड्रेसिंग रूम में उन्होंने हम सबको प्रेरित किया और दिखाया कि टीम उनके लिए सबसे पहले है।”
करुण नायर खुद भी चोट से जूझते हुए ओवल में हुए आखिरी टेस्ट में खेले। उन्होंने बताया कि पंत से उन्हें भी प्रेरणा मिली। नायर ने कहा, “ओवल टेस्ट में मेरी उंगली चोटिल थी, लेकिन पंत को देखकर मेरे लिए यह तय करना आसान हो गया कि टीम के लिए खेलना ही प्राथमिकता है।”
नायर का प्रदर्शन हालांकि उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। उन्होंने 8 पारियों में सिर्फ 205 रन बनाए, जिसमें एक अर्धशतक शामिल था। उन्होंने कहा कि कोच गौतम गंभीर का संदेश साफ था— व्यक्तिगत स्कोर से ज्यादा साझेदारियां टीम को जीत दिलाती हैं।
यह पूरी घटना भारतीय टीम की जुझारूपन और टीम के प्रति समर्पण की कहानी कहती है। ऋषभ पंत का यह साहसी कदम आने वाले समय में खिलाड़ियों के लिए एक मिसाल रहेगा।
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