भारत और पाकिस्तान के बीच हमेशा से मुकाबले बेहद रोमांचक माने जाते हैं। साल 2006 में कराची टेस्ट ऐसा ही एक मैच था, जिसे आज भी लोग याद करते हैं। इस टेस्ट में भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान ने पहले ही ओवर में हैट्रिक लेकर इतिहास रच दिया था। हालांकि, टीम इंडिया यह मैच और सीरीज हार गई, इसी वजह से इरफान इस हैट्रिक को अपनी सबसे यादगार उपलब्धियों में शामिल नहीं करते।
29 जनवरी 2006 को कराची में भारत और पाकिस्तान के बीच सीरीज का तीसरा और आखिरी टेस्ट खेला गया। पाकिस्तान की टीम बल्लेबाजी करने उतरी और इरफान पठान ने नई गेंद से कमाल कर दिया। अपने पहले ही ओवर में उन्होंने लगातार तीन गेंदों पर सलमान बट, यूनुस खान और मोहम्मद युसूफ को आउट कर दिया।
चौथी गेंद पर सलमान बट आउट
पांचवीं गेंद पर यूनुस खान पवेलियन लौटे
छठी गेंद पर मोहम्मद युसूफ भी बोल्ड हो गए
इस तरह इरफान पठान टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में पहले ही ओवर में हैट्रिक लेने वाले पहले गेंदबाज बन गए। साथ ही, वह पाकिस्तान की सरज़मीं पर टेस्ट में हैट्रिक लेने वाले पहले भारतीय भी बने।
इरफान ने बाद में एक इंटरव्यू में उस पल का ज़िक्र करते हुए कहा, “जब मैंने सलमान बट और यूनुस खान को लगातार दो गेंदों पर आउट किया तो मैंने सोचा कि अगली गेंद पर मोहम्मद युसूफ को एलबीडब्ल्यू करने की कोशिश करूंगा। मैंने वही किया, गेंद ठीक उसी जगह पर गिरी, वैसी ही स्विंग हुई और युसूफ क्लीन बोल्ड हो गए। जैसा मैंने सोचा था, वैसा ही हुआ।” इरफान के मुताबिक मोहम्मद युसूफ उनकी स्विंग को समझ ही नहीं पाए और स्टंप उड़ गए।
भले ही यह हैट्रिक ऐतिहासिक थी, लेकिन भारतीय टीम इस टेस्ट मैच में 341 रन से हार गई। पहले दो टेस्ट मैच ड्रॉ रहे थे, इसलिए पाकिस्तान ने यह सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली। इसी वजह से इरफान पठान इस हैट्रिक को अपनी पसंदीदा यादों में शामिल नहीं करते।
इरफान ने कहा,
“मैं हैट्रिक के बाद खुश था, लेकिन जब टीम हार गई तो वो खुशी पल भर में गायब हो गई। मैं हमेशा उन मुकाबलों को अपनी यादों में रखता हूं जिन्हें टीम ने जीता हो। जैसे – 2007 का टी20 वर्ल्ड कप फाइनल, 2004 में पाकिस्तान के खिलाफ अहम जीत या फिर पर्थ टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड। लेकिन कराची टेस्ट की याद मुझे खुशी नहीं देती।”
कराची टेस्ट में इरफान पठान का ये कारनामा भले ही रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज है, लेकिन खिलाड़ी के लिए टीम की जीत सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। यही वजह है कि इरफान अपनी हैट्रिक को इतिहास का हिस्सा तो मानते हैं, पर इसे अपनी निजी पसंदीदा यादों में शामिल नहीं करते।
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