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बड़ी खुशखबरी: सरिस्का और जमवारामगढ़ के जंगल मिलकर बनेंगे विशाल टाइगर कॉरिडोर, टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल बढ़कर होगा 1823 वर्ग किमी

जयपुर। राजस्थान के बाघ प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। अब सरिस्का टाइगर रिजर्व और जमवारामगढ़ का जंगल मिलकर एक बड़ा टाइगर कॉरिडोर बनाएंगे। इससे बाघों को सुरक्षित और खुला आवास क्षेत्र मिलेगा। इस योजना के लागू होने के बाद सरिस्का टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल बढ़कर 1823 वर्ग किलोमीटर हो जाएगा।


क्यों बनाया जा रहा है ये कॉरिडोर?

दोनों जंगलों को आपस में जोड़कर एक प्राकृतिक रास्ता (कॉरिडोर) बनाया जाएगा, ताकि बाघ एक जंगल से दूसरे जंगल में स्वतंत्र रूप से आवाजाही कर सकें और उन्हें नया आवास खोजने में आसानी हो।

यह निर्णय पूरे देश के टाइगर रिजर्व्स पर लागू होगा, जिससे बाघों की सुरक्षा और संरक्षण को मजबूती मिलेगी।


किसने दी मंजूरी?

  • यह प्रस्ताव राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनटीसीए) की 84वीं स्थायी समिति की बैठक में पारित हुआ।

  • बोर्ड ने मुख्य वन्यजीव वार्डन को इस योजना को अमल में लाने के निर्देश दिए हैं।


कहां-कहां से जोड़ा जाएगा जंगल?

सरिस्का बाघ परियोजना की ओर से 607 वर्ग किमी का नया बफर क्षेत्र बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें शामिल हैं:

  • 286.81 वर्ग किमी – अलवर वन मंडल से

  • 270.22 वर्ग किमी – जयपुर उत्तर वन मंडल से

  • 50.62 वर्ग किमी – दौसा वन मंडल से

इन इलाकों को जोड़कर सरिस्का टाइगर रिजर्व का क्षेत्रफल अब 1823 वर्ग किमी हो जाएगा।


क्या बोले विशेषज्ञ?

टाइगर ट्रेल्स ट्रस्ट की अध्यक्ष स्नेहा सोलंकी ने इसे एनटीसीए का शानदार कदम बताया। उनका कहना है कि जब ये जंगल आपस में जुड़ेंगे, तो बाघ ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगे और खुलकर रह सकेंगे। इससे उनके लिए बेहतर आवास और लंबी दूरी की आवाजाही की सुविधा संभव हो सकेगी।


यह कदम राजस्थान में वन्यजीव संरक्षण को नया आयाम देगा और टाइगर टूरिज्म को भी बढ़ावा मिल सकता है।

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