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राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान एक अलग ही स्थिति देखने को मिली। विपक्ष के बजाय सत्ताधारी पार्टी के ही कुछ विधायकों ने अपनी सरकार और उच्च शिक्षा मंत्री को घेर लिया। मामला निजी विश्वविद्यालयों में अनियमितताओं और फर्जी डिग्री बांटने के आरोपों से जुड़ा है।
“दो साल हो गए, बदलाव नहीं दिखा”
प्रश्नकाल के दौरान जब निजी विश्वविद्यालयों का मुद्दा उठा, तो कई विधायकों ने कहा कि सरकार को बने लगभग दो साल हो गए हैं, लेकिन अभी तक ठोस सुधार नहीं दिख रहा। उनका आरोप था कि कुछ निजी विश्वविद्यालय नियमों का पालन नहीं कर रहे और विभाग सिर्फ नोटिस जारी करने तक सीमित है।
मंत्री का जवाब
उच्च शिक्षा मंत्री प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है।
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निजी विश्वविद्यालयों पर निगरानी के लिए एक नियामक आयोग बनाया जाना था, लेकिन यह मामला अदालत में होने के कारण प्रक्रिया रुकी हुई है।
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जैसे ही अदालत से अनुमति मिलेगी, आयोग का गठन किया जाएगा।
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विभाग अपने स्तर पर जांच और कार्रवाई कर रहा है।
इन विश्वविद्यालयों पर कार्रवाई
मंत्री ने सदन में बताया कि 10 विश्वविद्यालयों के खिलाफ अनियमितताओं के मामले में कार्रवाई शुरू की गई है। इनमें झुंझुनूं, जोधपुर, कोटा, भीलवाड़ा, अलवर, चूरू, जयपुर और सीकर के कुछ निजी विश्वविद्यालय शामिल हैं।
एसओजी और जांच एजेंसियों की कार्रवाई
फर्जी डिग्री और गलत तरीके से मान्यता लेने के मामलों में एसओजी ने भी जांच शुरू की है।
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कुछ संचालकों और बिचौलियों की गिरफ्तारी की गई है।
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लोकायुक्त ने भी शिकायतों पर संज्ञान लेकर जांच प्रक्रिया तेज कर दी है।
सरकार क्यों घिरी?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जब सत्ताधारी पार्टी के विधायक ही अपनी सरकार से सवाल पूछें, तो यह सरकार के लिए असहज स्थिति होती है। विधायकों का कहना है कि पिछली सरकार के समय शुरू हुई गड़बड़ियां अब तक पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं और सख्त कार्रवाई की जरूरत है।
कुल मिलाकर, निजी विश्वविद्यालयों का मुद्दा फिलहाल राजस्थान की राजनीति में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।
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