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प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत गड़बड़ियों के मामले सामने आए हैं। सरकार ने इन मामलों पर सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने विधानसभा में कहा कि बीमा कंपनियों, बैंकों और सर्वेयरों की मिलीभगत से किसानों के क्लेम रोके गए और गलत आंकड़े पेश किए गए। अब इन मामलों की जांच विशेष अभियान समूह (SOG) से करवाई जाएगी और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होगी।
किसानों के भुगतान में देरी क्यों?
कई किसानों का भुगतान आधार और बैंक खाते के सत्यापन लंबित होने, नेफ्ट फेल होने या बीमित किसान की मृत्यु जैसे कारणों से अटका हुआ है। जिला कलेक्टरों को सत्यापन प्रक्रिया जल्दी पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसानों को जल्द राहत मिल सके।
सरकार ने रबी और खरीफ सीजन में कुल 6,328 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम जारी किया है। इसमें 188 करोड़ रुपये पिछली सरकार का बकाया भी शामिल है।
श्रीगंगानगर में बड़ा घोटाला
करणपुर क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। जांच में पता चला कि सर्वेयर ने किसानों और अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर किए।
1.70 लाख फॉर्म की जांच में 32 हजार फॉर्म ऐसे मिले, जिनमें 50–70 प्रतिशत नुकसान होने के बावजूद “शून्य नुकसान” दिखाया गया। इससे करीब 128 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। संबंधित बीमा कंपनी को दोषी मानते हुए केंद्र सरकार से उसे भविष्य में टेंडर न देने का अनुरोध किया गया है।
अन्य जिलों में भी शिकायतें
सालासर में एसबीआई बैंक में फर्जी दस्तावेजों से 71 खाते खोलकर प्रीमियम काटने का मामला सामने आया, जिसमें करीब 9 करोड़ रुपये की गड़बड़ी की आशंका है। इस पर भी एफआईआर दर्ज की गई है।
श्रीगंगानगर, जालौर, नागौर, चूरू और बीकानेर सहित कई जिलों से ऐसी शिकायतें मिली हैं।
सरकार का आश्वासन
राज्य स्तरीय शिकायत निवारण समिति के माध्यम से 122 करोड़ रुपये का भुगतान कराने का आश्वासन दिया गया है। मंत्री ने कहा कि किसानों का हक हर हाल में दिलाया जाएगा और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
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