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नागौर जिले के कॉलेज छात्रों ने सेमेस्टर प्रणाली को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर सेमेस्टर में किसी न किसी विषय में ‘बैक’ (फेल) देकर उनसे दोबारा परीक्षा फीस ली जा रही है। इससे छात्रों पर आर्थिक और मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
दो बार परीक्षा, दो बार फीस
नई शिक्षा नीति 2020 के तहत साल में दो बार परीक्षा हो रही है। पहले साल में एक बार परीक्षा होती थी और फीस भी एक बार ही लगती थी। अब हर सेमेस्टर में परीक्षा होने से फीस भी दो बार देनी पड़ती है।
छात्रों का कहना है कि कई बार अच्छे अंक होने के बावजूद एक विषय में बैक दे दी जाती है। पूरे सेमेस्टर की फीस 1700 से 1800 रुपये है, जबकि एक बैक विषय की परीक्षा के लिए 1350 रुपये अलग से देने पड़ते हैं।
रिवैल्यूएशन की सुविधा नहीं
पहले कम अंक आने पर छात्र पुनर्मूल्यांकन (रिवैल्यूएशन) या रीचेकिंग करवा सकते थे। अब यह सुविधा नहीं है। बैक आने पर सीधे दोबारा परीक्षा देनी पड़ती है और फीस भी भरनी होती है। इससे खासकर आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को परेशानी हो रही है।
सभी कॉलेजों में यही स्थिति
नागौर जिले के सभी कॉलेज एक ही विश्वविद्यालय से जुड़े हैं और सभी जगह यही समस्या सामने आ रही है। छात्रों का कहना है कि आंतरिक मूल्यांकन और थ्योरी में अच्छे अंक होने के बावजूद एक विषय में फेल कर दिया जाता है।
मुख्य समस्याएं
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बार-बार बैक आना
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अतिरिक्त फीस का बोझ
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पुनर्मूल्यांकन की सुविधा नहीं
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पढ़ाई में देरी
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मानसिक दबाव
प्रशासन का जवाब
छात्र संगठनों का कहना है कि यह व्यवस्था गलत है और वे इस मुद्दे को उच्च स्तर तक ले जाएंगे।
कॉलेज प्रशासन का कहना है कि छात्रों की शिकायत उच्च अधिकारियों तक भेज दी गई है।
छात्रों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो तीन साल की डिग्री पूरी करने में चार साल लग सकते हैं।
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