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राजस्थान सरकार अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाने जा रही है। योजना है कि अरावली क्षेत्र में टेरिटोरियल आर्मी को इको टास्क फोर्स (ETF) के रूप में तैनात किया जाए। वन विभाग ने इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया है और अब केंद्र सरकार की मंजूरी का इंतजार है।
कहां तैनात होगी टास्क फोर्स?
शुरुआत में उदयपुर, अलवर और अजमेर जिलों में बटालियन तैनात की जा सकती है।
हर बटालियन में करीब 200 जवान होंगे।
ये जवान इन कामों में जुटेंगे:
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बड़े पैमाने पर पौधरोपण
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पौधों की देखरेख
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अवैध कटाई और अतिक्रमण पर रोक
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जैव विविधता की सुरक्षा
अरावली का महत्व
राजस्थान में अरावली पर्वतमाला करीब 550 किलोमीटर तक फैली है। यह 19 जिलों से होकर गुजरती है, जिनमें सिरोही, उदयपुर, राजसमंद, भीलवाड़ा, अजमेर, टोंक, दौसा और अलवर प्रमुख हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अरावली:
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भूजल स्तर बढ़ाने में मदद करती है
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वर्षा चक्र को संतुलित रखती है
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तापमान नियंत्रित करती है
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मरुस्थलीकरण को रोकती है
सरकार अब सावधानी से उठा रही कदम
पहले अरावली की परिभाषा को लेकर विवाद हुआ था, जिस पर पर्यावरण संगठनों ने विरोध जताया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मुद्दे पर पुनर्विचार किया था। इसके बाद सरकार अब अरावली संरक्षण के मामले में सावधानी से फैसले ले रही है। इको टास्क फोर्स की तैनाती भी इसी दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
जैसलमेर में पहले से काम कर रही है ETF
राजस्थान में जैसलमेर में पहले से इको टास्क फोर्स काम कर रही है। वहां मरुस्थलीकरण रोकने और हरियाली बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अच्छे परिणाम भी सामने आए हैं। अब अरावली प्रदेश का दूसरा बड़ा क्षेत्र होगा जहां ETF तैनात की जाएगी।
देश के अन्य राज्यों में भी तैनाती
इको टास्क फोर्स इन राज्यों में भी काम कर रही है:
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उत्तराखंड
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हिमाचल प्रदेश
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मध्य प्रदेश
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छत्तीसगढ़
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ओडिशा
अंतिम फैसला केंद्र सरकार का
वन विभाग ने ETF का ढांचा, मुख्यालय, बजट और कार्यक्षेत्र का प्रारंभिक खाका तैयार कर लिया है। राज्य सरकार की सिफारिश के बाद अब केंद्र सरकार इस पर अंतिम निर्णय लेगी।
अधिकारियों का कहना है कि टेरिटोरियल आर्मी की तैनाती अरावली को बचाने की दिशा में एक बड़ा और मजबूत कदम साबित होगी।
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