Breaking News

चूरू के राजलदेसर में बिना डॉक्टर के चल रहा पशु अस्पताल, एक कर्मचारी के भरोसे इलाज

चूरू जिले की राजलदेसर तहसील में स्थित प्रथम श्रेणी सरकारी पशु चिकित्सालय सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में डॉक्टर नहीं होने के कारण पूरा काम सिर्फ एक पशुधन सहायक के भरोसे चल रहा है।

दवाओं और सुविधाओं की कमी

निशुल्क दवा योजना के तहत 180 प्रकार की दवाएं स्वीकृत हैं, लेकिन अस्पताल में केवल 119 सामान्य बीमारियों की दवाएं ही उपलब्ध हैं। गंभीर बीमारियों की दवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
इसके अलावा अस्पताल में:

  • पशुओं को लाने के लिए एंबुलेंस की सुविधा नहीं है।

  • भर्ती (इंडोर) इलाज की व्यवस्था नहीं है।

  • घायल पशुओं के लिए रैंप भी नहीं बना है।

  • भवन की उत्तर दिशा में चारदीवारी नहीं है, जिससे व्यवस्था प्रभावित हो रही है।

8 महीने से खाली हैं पद

अस्पताल में एक वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी और दो पशु चिकित्सा सहायक के पद पिछले 8 महीनों से खाली पड़े हैं। अभी पूरा अस्पताल सिर्फ एक पशुधन सहायक, पूनम कुमारी, के भरोसे चल रहा है।
उनके अनुसार रोजाना 10 से 12 पशुओं का इलाज आउटडोर में किया जाता है।

यह अस्पताल कस्बे सहित नूवां, सिमसिया और भरपालसर ग्राम पंचायतों के कुल 13 गांवों को सेवा देता है।

बाहर से बुलाने पड़ते हैं डॉक्टर

पशुपालकों का कहना है कि जब अस्पताल में डॉक्टर ही नहीं है, तो वहां पशु ले जाने का कोई फायदा नहीं है। मजबूरी में उन्हें घूमंतू और अनुभवहीन चिकित्सकों से इलाज कराना पड़ता है।
कई बार हालत गंभीर होने पर रतनगढ़ या डूंगरगढ़ से निजी वाहन से डॉक्टर बुलाने पड़ते हैं, जिससे समय और पैसा दोनों खर्च होता है।

समाधान की मांग

स्थानीय लोगों का आरोप है कि लंबे समय से पद खाली होने के बावजूद जनप्रतिनिधि और अधिकारी इस समस्या पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
इस वजह से पशुपालकों और उनके पशुओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

About admin

Check Also

निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 गाड़ियां, बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने वाहन कम करने से किया इनकार!

बिहार में मंत्री के काफिले पर सियासत तेज, निशांत कुमार के काफिले में दिखीं 13 …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Channel 009
help Chat?