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प्रदेश में भूकंप का खतरा बढ़ने के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य को भूकंप जोन-6 में रखा गया है, जिससे इसे ज्यादा संवेदनशील क्षेत्र माना जाएगा। इसी को ध्यान में रखते हुए भवन निर्माण के नियमों (बिल्डिंग बायलॉज) में बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
मुख्य सचिव आनंदवर्द्धन की अध्यक्षता में हुई बैठक में भूकंप से निपटने की रणनीति पर चर्चा की गई। बैठक में तय किया गया कि मौजूदा निर्माण नियमों को बदलकर उन्हें अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक बनाया जाएगा। इसके लिए 15 सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया है। इस समिति के अध्यक्ष सीबीआरआई रुड़की के निदेशक प्रो. आर. प्रदीप कुमार और संयोजक डॉ. शांतनु सरकार बनाए गए हैं।
अभी राज्य में भवन निर्माण नियम भारतीय मानक ब्यूरो के पुराने मानकों (आईएस 1893-2002) पर आधारित हैं। लेकिन बढ़ते भूकंपीय खतरे को देखते हुए अब नए और आधुनिक मानकों को शामिल किया जाएगा। नए नियमों में भूकंपरोधी डिजाइन, भू-तकनीकी जांच, स्ट्रक्चरल सेफ्टी और विंड लोड जैसे पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। साथ ही पहाड़ी क्षेत्रों की पारंपरिक निर्माण शैली को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ा जाएगा।
समिति में शामिल होंगे विशेषज्ञ
इस समिति में सीबीआरआई रुड़की, भारतीय मानक ब्यूरो, आईआईटी, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग, विकास प्राधिकरण और भू-वैज्ञानिक विशेषज्ञों सहित कई तकनीकी संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति वास्तुविदों और अभियंताओं से भी सुझाव लेगी। इसका उद्देश्य वर्तमान नियमों का अध्ययन कर उन्हें भूकंप, जलवायु और आधुनिक तकनीक के अनुसार अपडेट करना है।
सुरक्षित निर्माण पर रहेगा फोकस
सरकार का कहना है कि यह बदलाव केवल नियमों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सुरक्षित निर्माण की संस्कृति को बढ़ावा देने की दिशा में कदम होगा। संशोधित नियम लागू होने के बाद शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक सुरक्षित भवन बन सकेंगे और आपदा के जोखिम को कम किया जा सकेगा।
राज्य सरकार का लक्ष्य है कि नए नियमों के जरिए भूकंप से होने वाले नुकसान को कम किया जाए और भविष्य के लिए मजबूत और सुरक्षित निर्माण व्यवस्था तैयार की जाए।
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