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पश्चिम बंगाल में इस साल विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव से पहले बीजेपी ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। 14 मार्च को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बड़ी रैली होने वाली है। इस रैली के साथ ही बीजेपी चुनाव अभियान की शुरुआत करने जा रही है। पार्टी इस बार ममता बनर्जी के मजबूत किले को तोड़ने की कोशिश कर रही है।
पिछले 10 साल में बढ़ा बीजेपी का प्रभाव
पिछले एक दशक में पश्चिम बंगाल में बीजेपी का जनाधार तेजी से बढ़ा है। 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के पास केवल 3 सीटें थीं। लेकिन 2021 के चुनाव में बीजेपी ने 77 सीटों पर जीत हासिल की थी।
लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी ने 18 सीटें जीती थीं, जबकि 2024 के चुनाव में उसे 12 सीटें मिलीं। हालांकि पार्टी नेताओं का कहना है कि सीटें कम होने के बावजूद वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी हुई है।
SIR को लेकर राजनीति गरम
विधानसभा चुनाव से पहले राज्य में SIR मुद्दे को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर कई बार आरोप लगाए हैं।
ममता के ‘M’ फैक्टर की काट की कोशिश
बीजेपी ममता बनर्जी के ‘M’ फैक्टर को चुनौती देने की रणनीति बना रही है। यहां ‘M’ का मतलब महिला और मुसलमान वोटर से है।
बीजेपी नेताओं का मानना है कि अन्य राज्यों की तरह अगर महिलाओं के लिए आर्थिक सहायता की योजना घोषित की जाए, तो इसका फायदा पार्टी को मिल सकता है।
मुस्लिम वोट बैंक की भूमिका
बंगाल की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। माना जाता है कि इसी समर्थन की वजह से ममता बनर्जी लगातार सत्ता में बनी हुई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर मुस्लिम बहुल इलाकों में वोटिंग का पैटर्न थोड़ा भी बदला, तो चुनाव परिणाम पर असर पड़ सकता है।
बीजेपी के सामने बड़ी चुनौती
बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुस्लिम वोट बैंक में सेंध लगाना और ममता सरकार की नकद सहायता योजनाओं का मुकाबला करना है।
पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य में लगभग 35 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम आबादी ज्यादा है, और इन सीटों पर आमतौर पर TMC को समर्थन मिलता है। हालांकि इन क्षेत्रों के बाहर बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा है और पार्टी उसे और बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
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