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शिक्षा का अधिकार (RTE) योजना में नर्सरी कक्षा शामिल नहीं होने के कारण कई अभिभावक परेशान हैं। शहर के ज्यादातर निजी स्कूलों में तीन साल के बच्चों को नर्सरी में दाखिला दिलाने के लिए सालाना 40 से 50 हजार रुपये तक फीस ली जा रही है। इससे मध्यम और गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
अभिभावकों का कहना है कि पहले कई स्कूलों में शुरुआती कक्षाओं में कम फीस में पढ़ाई की सुविधा मिल जाती थी, लेकिन अब नर्सरी कक्षा को आरटीई योजना से बाहर कर दिया गया है। इसके कारण उन्हें निजी स्कूलों की पूरी फीस देनी पड़ रही है। कई स्कूलों में एडमिशन के समय रजिस्ट्रेशन और अन्य शुल्क भी अलग से लिया जाता है।
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार आरटीई योजना के तहत अभी कक्षा 1 से 12वीं तक के बच्चों को ही नि:शुल्क शिक्षा का प्रावधान है। नर्सरी और प्री-प्राइमरी कक्षाएं इस योजना में शामिल नहीं हैं, इसलिए इन कक्षाओं में प्रवेश स्कूल के नियम और फीस के अनुसार ही होता है।
आरटीई के तहत कमजोर और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया जारी है। इच्छुक अभिभावक 31 मार्च तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद लॉटरी के जरिए बच्चों का चयन किया जाएगा और उन्हें निजी स्कूलों में प्रवेश मिलेगा।
अभिभावकों का कहना है कि अगर नर्सरी कक्षा को भी आरटीई योजना में शामिल किया जाए तो छोटे बच्चों की पढ़ाई शुरू करने में आर्थिक बोझ कम हो सकता है।
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