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मध्य प्रदेश में इंदौर-उज्जैन रेल मार्ग को विकसित करने के लिए रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। 2028 में होने वाले सिंहस्थ के दौरान ज्यादा से ज्यादा ट्रेनें चलाने के लिए कई नई सुविधाएं बनाई जाएंगी।
नई सुविधाएं और ट्रेनों की बढ़ी क्षमता
- 7 नई पिट लाइनें और 16 नई स्टेबलिंग लाइनें बनाई जाएंगी।
- इसके जरिए प्रतिदिन 21 प्राइमरी मेंटेनेंस और 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों सहित 32 अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन संभव होगा।
- नई बायपास लाइन और ऑटोमेटिक सिग्नल लगाए जाएंगे, जिससे ट्रेनें सुरक्षित और तेज चलेंगी।
प्रमुख स्टेशनों का विकास
- इंदौर स्टेशन
- वर्तमान में 6 प्लेटफॉर्म और 5 पिट लाइनें हैं।
- स्टेशन का पुनर्विकास कार्य प्रगति पर है, जिससे यात्रियों को बेहतर सुविधाएं और अतिरिक्त ट्रेनों का संचालन आसान होगा।
- लक्ष्मीबाई नगर स्टेशन
- यहां 7 स्टेबलिंग लाइनें और 5 नई पिट लाइनें बनाई जाएंगी।
- दो नए प्लेटफॉर्म और कोचिंग मेंटेनेंस डिपो (259 करोड़ की लागत) भी बनेगा।
- स्टेशन में नया भवन, फुट ओवर ब्रिज, लिफ्ट/एस्केलेटर और कवर शेड जैसी सुविधाएं होंगी।
- डॉ. अंबेडकर नगर (महू)
- 2 नई पिट लाइनें बनेंगी।
- प्लेटफॉर्म लंबाई और कनेक्टिविटी सुधार के बाद यहां ज्यादा ट्रेनों का संचालन संभव होगा।
- उज्जैन जंक्शन
- 9 नई स्टेबलिंग/होल्डिंग लाइनें बनाई जाएंगी।
- इससे लगभग 11 प्लेटफॉर्म रिटर्न ट्रेनों की क्षमता बढ़ेगी।
सार
नई पिट और स्टेबलिंग लाइनें, ऑटोमेटिक सिग्नल और बायपास लाइन के जरिए इंदौर-उज्जैन मार्ग की ट्रेनों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। सिंहस्थ 2028 के दौरान यात्रियों को बेहतर सुविधा और ज्यादा ट्रेनों का लाभ मिलेगा।
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