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राजस्थान में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव समय पर नहीं हो पाए हैं। 15 अप्रैल तक चुनाव नहीं कराने पर हाईकोर्ट की नाराजगी के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग कोर्ट में अपना पक्ष रखने की तैयारी कर रहा है।
चुनाव में देरी क्यों हुई?
आयोग का कहना है कि चुनाव की पूरी तैयारी मार्च की शुरुआत में ही कर ली गई थी, लेकिन राज्य सरकार से जरूरी जानकारी समय पर नहीं मिली। इसी वजह से चुनाव की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
पंचायत चुनाव की स्थिति
- 31 दिसंबर 2025 को परिसीमन (सीमा तय करना) पूरा हो गया था।
- इसके बाद मतदाता सूची बनाई गई और 25 फरवरी 2026 को अंतिम सूची जारी कर दी गई।
- इसके बाद सरकार को SC, ST, OBC और महिलाओं के लिए आरक्षण तय करके आयोग को बताना था।
- लेकिन यह जानकारी समय पर नहीं मिली, जिससे चुनाव अटक गए।
आयोग ने 9 मार्च को सरकार को पत्र लिखकर जल्दी सूचना देने को कहा था और देरी पर चेतावनी भी दी थी। इसके बावजूद 31 मार्च को जवाब मिला कि प्रक्रिया अभी चल रही है।
नगरीय निकाय चुनाव में भी देरी
नगर निकाय चुनावों में भी यही समस्या आई। आयोग ने कई बार सरकार से पूछा कि जिन निकायों का परिसीमन रद्द हुआ है, वहां चुनाव कैसे होंगे, लेकिन स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
- 20 फरवरी 2026 को आयोग ने 196 निकायों के लिए खुद ही मतदाता सूची बनाने का कार्यक्रम जारी किया।
- इनकी अंतिम सूची 22 अप्रैल 2026 को जारी होगी।
- बाद में 113 निकायों के लिए 24 मार्च को अलग कार्यक्रम जारी किया गया, जिसकी अंतिम सूची 8 मई 2026 को आएगी।
लगातार पत्राचार के बाद भी समाधान नहीं
आयोग ने दिसंबर 2025 से लेकर फरवरी 2026 तक कई बार सरकार को पत्र लिखे, लेकिन समय पर स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से पूरी प्रक्रिया प्रभावित हुई।
अब क्या होगा?
अब आयोग कोर्ट में यह बताएगा कि चुनाव में देरी उसकी वजह से नहीं, बल्कि जरूरी जानकारी समय पर नहीं मिलने के कारण हुई है। कोर्ट के फैसले के बाद ही आगे की स्थिति साफ होगी।
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