Related Articles
राजस्थान के झालावाड़ जिले के किसान शिवप्रसाद मालव ने पीले तरबूज और मीठे खरबूजे की खेती कर बड़े पैमाने पर सफलता पाई है। महज तीन बीघा जमीन पर की गई इस खेती से उनकी कमाई लाखों में हो रही है।
किसान की शुरुआत:
शिवप्रसाद ने करीब चार साल पहले वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक दानमल मालव की सलाह पर मध्य प्रदेश से बीज मंगाकर खेती शुरू की। पहले साल ही अच्छा मुनाफा मिलने के बाद उन्होंने इसे नियमित रूप से अपनाया।
पीला तरबूज:
इस साल उन्होंने पीले तरबूज की खेती भी शुरू की, जो बाहर से पीला और अंदर से लाल, मीठा व रसदार होता है। इसकी बाजार में मांग तेजी से बढ़ रही है।
बीज और लागत:
- खरबूजे का बीज: 6500 रुपए प्रति 100 ग्राम
- पीले तरबूज का बीज: 7800 रुपए प्रति 100 ग्राम
100 ग्राम बीज एक बीघा खेत के लिए पर्याप्त होता है। साथ ही कीट नियंत्रण के लिए कीटनाशकों का उपयोग भी जरूरी है।
सरकारी अनुदान:
- बूंद-बूंद सिंचाई योजना: 70% तक सब्सिडी
- मल्चिंग: 50% सब्सिडी
अनुदान एक बार मिलने के बाद अगले तीन वर्षों तक नहीं मिलता।
बाजार में भाव:
- खरबूजा: करीब 25 रुपए प्रति किलो
- तरबूज: 20 रुपए प्रति किलो या उससे अधिक
अधिक उत्पादन होने पर फसल जयपुर तक भेजी जाती है।
कमाई का अनुभव:
- पहले साल लागत: 1.5 लाख रुपए, फसल की बिक्री: 3 लाख रुपए
- दूसरे साल लागत: 50 हजार रुपए, फसल की बिक्री: 3 लाख रुपए
- तीसरे साल भी अच्छी आमदनी बनी हुई है।
सीधे खेत से बिक्री:
अब लोग उनकी मिठास और गुणवत्ता के कारण सीधे खेत पर आकर खरबूजा और तरबूज खरीदने लगे हैं।
किसानों के लिए सब्सिडी:
- सब्जी फसल के लिए अधिकतम 5 हेक्टेयर तक: ड्रिप सिंचाई 70%, मल्चिंग और लो टनल 50%
- फलदार पौधों की खेती पर: 50 हजार रुपए तक अनुदान (पहले वर्ष 30 हजार, दूसरे वर्ष 20 हजार)
सुझाव:
वरिष्ठ कृषि पर्यवेक्षक दानमल मालव के अनुसार, फलदार और विशेष फसल की खेती से किसानों की आमदनी बढ़ाई जा सकती है और सरकार की सब्सिडी इसका अच्छा समर्थन है।
CHANNEL009 Connects India
