आर्थिक संकट और बढ़ते कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान ने राजस्व बढ़ाने के लिए शराब निर्यात की दिशा में कदम उठाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान अब गैर-मुस्लिम देशों को शराब की सप्लाई कर रहा है। यह फैसला इसलिए चर्चा में है क्योंकि करीब 50 साल पहले पाकिस्तान में इस्लाम का हवाला देते हुए शराब पर सख्त पाबंदियां लगाई गई थीं।
पाकिस्तान में मुस्लिम नागरिकों के लिए शराब का सेवन प्रतिबंधित है, लेकिन गैर-मुस्लिम समुदाय और लाइसेंस प्राप्त संस्थानों के लिए सीमित अनुमति दी जाती रही है। अब विदेशी बाजारों में शराब की बिक्री को आर्थिक कमाई के नए स्रोत के तौर पर देखा जा रहा है।
जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान लंबे समय से विदेशी मुद्रा संकट, महंगाई और कर्ज के दबाव से गुजर रहा है। ऐसे में सरकार और संबंधित कंपनियां ऐसे सेक्टर तलाश रही हैं, जिनसे निर्यात बढ़े और डॉलर कमाई हो सके।
हालांकि, शराब निर्यात का मुद्दा पाकिस्तान में राजनीतिक और धार्मिक बहस भी खड़ी कर सकता है। एक तरफ इसे आर्थिक मजबूरी बताया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ कट्टरपंथी समूह इसे धार्मिक नीति के खिलाफ बता सकते हैं।
करीब पांच दशक पहले पाकिस्तान में शराब को इस्लामी कानूनों के आधार पर प्रतिबंधित किया गया था। ऐसे में अब शराब निर्यात शुरू करने को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि देश के अंदर जिस चीज पर धार्मिक आधार पर पाबंदी है, उसे बाहर बेचकर कमाई करना कितना उचित है।
फिलहाल पाकिस्तान के इस कदम को आर्थिक संकट से निकलने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना होगा कि शराब निर्यात से पाकिस्तान को कितनी कमाई होती है और देश के भीतर इस पर कैसी प्रतिक्रिया आती है।
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