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पटाखा फैक्ट्री हादसे पर उठे बड़े सवाल
अधूरी फैक्ट्री को लाइसेंस कैसे मिला? 6 सरकारी विभागों की भूमिका पर घिरा सिस्टम
पटाखा फैक्ट्री हादसे के बाद अब पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में है। हादसे में हुई मौतों के बाद यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अधूरी फैक्ट्री को संचालन की अनुमति कैसे मिल गई और सुरक्षा मानकों की जांच किसने की।
स्थानीय लोगों और सूत्रों का दावा है कि फैक्ट्री में बारूद और ज्वलनशील सामग्री का भंडारण लंबे समय से हो रहा था, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने समय रहते कार्रवाई नहीं की। अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या प्रशासनिक लापरवाही या किसी “माननीय” के दबाव में नियमों को नजरअंदाज किया गया।
जानकारी के मुताबिक, फैक्ट्री से जुड़े मामलों में कई सरकारी विभागों की भूमिका सामने आ रही है। इनमें स्थानीय प्रशासन, प्रदूषण विभाग, फैक्ट्री निरीक्षण, अग्निशमन विभाग और अन्य एजेंसियां शामिल हैं।
हादसे के बाद लोगों में भारी गुस्सा है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। विपक्ष ने भी सरकार को घेरते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।
फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा जा रहा है। हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा नियमों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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