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आयुष्मान योजना को लेकर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। बरेली में डॉक्टरों और सरकार के बीच इस योजना को लेकर तनातनी साफ नजर आ रही है।
डॉक्टरों के खिलाफ साजिश का आरोप
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मदन मोहन पालीवाल ने आरोप लगाया है कि आयुष्मान योजना डॉक्टरों को बदनाम करने और परेशान करने का एक तरीका बन गई है। उन्होंने अपने पत्र में कहा कि इस योजना का मकसद आम जनता को डॉक्टरों के खिलाफ भड़काना है। यह पत्र उन्होंने सीएमओ कार्यालय को भेजा और IMA के व्हाट्सएप ग्रुप में भी साझा किया।
दीपमाला अस्पताल के डॉक्टर के बयान से बढ़ा विवाद
दीपमाला अस्पताल के डॉ. सोमेश मेहरोत्रा ने आयुष्मान योजना को “धोखा” बताया और जिला अस्पताल की व्यवस्था को “चूरन-चटनी वाला इलाज” कहा। उन्होंने राजनेताओं और अधिकारियों पर अस्पताल के बजट में भ्रष्टाचार का आरोप भी लगाया। इस बयान के बाद उन पर कानूनी कार्रवाई की तैयारी हो रही है।
आईएमए अध्यक्ष का बचाव और आरोप
आईएमए प्रदेश अध्यक्ष डॉ. पालीवाल ने डॉ. सोमेश मेहरोत्रा का बचाव करते हुए उन्हें “संभ्रांत और कर्मठ डॉक्टर” कहा। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आयुष्मान योजना के तहत अस्पतालों के लाखों रुपये के दावे पास नहीं हो रहे हैं, जिससे डॉक्टर परेशान हैं। उनका कहना है कि अगर डॉक्टरों पर लगातार दबाव रहेगा, तो वे गुस्सा जाहिर करेंगे।
बरेली में आंकड़े और खामियां
बरेली जिले में अब तक 4 लाख मरीजों का आयुष्मान योजना के तहत इलाज हुआ है, जिनमें से 3.2 लाख मरीज प्राइवेट अस्पतालों में इलाज करवा चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि क्लेम पास होने में देरी और अन्य तकनीकी समस्याएं उनकी परेशानी बढ़ा रही हैं।
जांच और आगे की कार्रवाई
सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह ने बताया कि इस मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। जांच के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई होगी। आईएमए के प्रदेश अध्यक्ष के बयान से सरकार और डॉक्टरों के बीच यह विवाद और गहरा गया है।
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