NCERT ने 9वीं सोशल साइंस से संविधान प्रस्तावना हटाई, SIR और इमरजेंसी पर चैप्टर जोड़ा
channel_009 | Education News
NCERT की 9वीं कक्षा की सोशल साइंस किताब को लेकर बड़ा बदलाव सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, नई किताब से संविधान की प्रस्तावना को हटाया गया है, जबकि SIR और इमरजेंसी से जुड़े चैप्टर जोड़े गए हैं। इसी के साथ “सोशलिस्ट” और “सेक्युलर” शब्दों का जिक्र न होने को लेकर भी विवाद शुरू हो गया है।
संविधान की प्रस्तावना भारत के लोकतांत्रिक ढांचे, न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुता जैसे मूल सिद्धांतों को समझाने वाला महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है। ऐसे में इसे 9वीं की सोशल साइंस किताब से हटाने की खबर ने शिक्षा और राजनीति दोनों क्षेत्रों में बहस छेड़ दी है।
विपक्ष और कई शिक्षाविदों का सवाल है कि छात्रों को संविधान की मूल भावना से जोड़ने वाले हिस्से को हटाने की जरूरत क्यों पड़ी। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि पाठ्यक्रम में बदलाव समय-समय पर शिक्षा को अपडेट करने के लिए किए जाते हैं और नए चैप्टर छात्रों को देश के राजनीतिक और ऐतिहासिक घटनाक्रम को समझने में मदद करेंगे।
इमरजेंसी पर चैप्टर जोड़ने को भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण अध्याय है। लेकिन प्रस्तावना और “सोशलिस्ट-सेक्युलर” जैसे शब्दों के संदर्भ को लेकर विवाद अभी थमने वाला नहीं दिख रहा।
अब नजर NCERT की आधिकारिक सफाई और शिक्षा मंत्रालय की प्रतिक्रिया पर रहेगी। यह मामला सिर्फ किताबों का बदलाव नहीं, बल्कि बच्चों को लोकतंत्र और संविधान कैसे पढ़ाया जाए, इस बड़ी बहस से जुड़ गया है।
channel_009 निष्कर्ष:
NCERT की 9वीं सोशल साइंस किताब में बदलाव ने शिक्षा, संविधान और राजनीति से जुड़ी नई बहस खड़ी कर दी है। प्रस्तावना हटाने और नए चैप्टर जोड़ने के फैसले पर अब देशभर में चर्चा तेज हो सकती है।
आपकी राय क्या है — क्या स्कूल की किताबों में संविधान की प्रस्तावना को जरूर शामिल किया जाना चाहिए? कमेंट में बताइए।

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