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अजमेर स्थित राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में स्टाफ और सदस्यों की कमी के कारण भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर चिंता बढ़ गई है। आयोग में नियम के अनुसार अध्यक्ष सहित कुल 10 सदस्य होने चाहिए, लेकिन फिलहाल अध्यक्ष के साथ सिर्फ 6 सदस्य ही काम कर रहे हैं।
कई सदस्य नहीं हैं सक्रिय
आयोग के एक सदस्य बाबूलाल कटारा पेपर लीक मामले में निलंबित हैं। इसके अलावा जसवंत राठी का निधन हो चुका है, जबकि डॉ. मंजू शर्मा और डॉ. संगीत आर्य इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में आयोग के बाकी सदस्यों पर काम का बोझ बढ़ गया है।
अगले कुछ महीनों में और पद होंगे खाली
आने वाले महीनों में आयोग में और पद खाली होने वाले हैं।
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अध्यक्ष उत्कल रंजन का कार्यकाल 12 जून को समाप्त होगा।
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सदस्य के.सी. मीणा 8 जुलाई को सेवानिवृत्त होंगे।
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डॉ. अशोक कलवार का कार्यकाल 31 जुलाई को खत्म होगा।
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निलंबित सदस्य बाबूलाल कटारा का कार्यकाल 14 अगस्त को पूरा होगा।
इसके बाद आयोग में केवल चार सदस्य ही रह जाएंगे, जिससे परीक्षाएं और इंटरव्यू करवाने में कठिनाई हो सकती है।
कई भर्तियां पहले से ही देरी में
आरपीएससी की कई बड़ी भर्तियों में पहले से देरी हो रही है।
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आरएएस 2023 भर्ती की प्री और मुख्य परीक्षा लगभग दो साल में पूरी हुई और अंतिम परिणाम अभी बाकी है।
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आरएएस 2024 में प्री और मुख्य परीक्षा हो चुकी है, लेकिन अभी साक्षात्कार चल रहे हैं।
इसके अलावा कई अन्य भर्तियां भी 8 से 12 महीने की देरी से चल रही हैं।
आने वाले महीनों में कई बड़ी परीक्षाएं
आरपीएससी के कैलेंडर के अनुसार आने वाले समय में सहायक अभियंता, सब इंस्पेक्टर, वेटनरी ऑफिसर, सहायक कृषि अभियंता, वरिष्ठ अध्यापक, जूनियर लीगल ऑफिसर, सांख्यिकी अधिकारी और अन्य कई पदों की परीक्षाएं प्रस्तावित हैं। इससे आयोग पर काम का दबाव और बढ़ सकता है।
UPSC के मुकाबले ज्यादा लंबी प्रक्रिया
जहां संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) अधिकतर भर्तियां 6 से 12 महीने में पूरी कर देता है, वहीं आरपीएससी में भर्ती प्रक्रिया 15 से 30 महीने तक चलती है। इसके पीछे पेपर लीक, दोबारा परीक्षा, सदस्यों की कमी और तारीखों में बदलाव जैसे कारण बताए जाते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय रहते नए सदस्यों की नियुक्ति नहीं की गई तो भर्ती परीक्षाओं और लाखों अभ्यर्थियों की तैयारी पर इसका असर पड़ सकता है।
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