Breaking News

Success Story: मन के जीते जीत है – पैरालंपिक में देश का नाम रोशन करने वाली पैरा शूटर मोना अग्रवाल की प्रेरणादायक कहानी

जयपुर की मोना अग्रवाल ने पहली ही बार में पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रच दिया। उन्होंने अपने संघर्ष, मेहनत और आत्मविश्वास से सबको दिखा दिया कि मन में ठान लो तो कुछ भी नामुमकिन नहीं।

कठिन हालात में भी नहीं मानी हार

मोना ने बताया कि जब उन्होंने शूटिंग शुरू की थी, तब कोई उन्हें जानता तक नहीं था। उनके पास अच्छे इक्विपमेंट और कोचिंग जैसी सुविधाएं भी नहीं थीं। लेकिन एक सपना था – पोडियम पर खड़े होकर देश का झंडा ऊंचा करना।
वो दिन-रात इसी सपने को जीती रहीं और आखिरकार पेरिस पैरालंपिक में कांस्य पदक जीत ही लिया।

लोगों की बातों पर नहीं दिया ध्यान

मोना ने कहा, “लोग मेरी बातों को मजाक समझते थे, लेकिन मैंने कभी किसी की बातों को अपने लक्ष्य के बीच नहीं आने दिया।”
उन्होंने जूनियर और सीनियर स्तर की प्रतियोगिताओं में जीत हासिल कर अपनी सही दिशा को पहचाना और उसी पर आगे बढ़ती गईं।

अब और ऊंचे लक्ष्य की ओर

अब मोना का अगला लक्ष्य है –

  • 2026 एशियन पैरागेम्स में मेडल

  • 2028 पैरालंपिक के लिए कोटा हासिल करना
    इसके लिए वे देश और विदेश में बेहतर ट्रेनिंग और इक्विपमेंट के लिए लगातार मेहनत कर रही हैं।

युवाओं को दिया खास संदेश

मोना ने युवाओं को संदेश दिया, “सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता। मेहनत, लगन और धैर्य ही हमें चैंपियन बनाते हैं।”
उन्होंने कहा, “अगर मन में ठान लें कि जीतना है, तो हमें कोई नहीं रोक सकता।

अवनि लेखरा के साथ जीत की खुशी

पेरिस पैरालंपिक में मोना और अवनि लेखरा दोनों ने भारत के लिए पदक जीते।
अवनि ने गोल्ड और मोना ने कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया।
मोना ने कहा, “यह मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशी थी।”

निष्कर्ष:
मोना अग्रवाल की कहानी हमें सिखाती है कि मुश्किलें चाहे जितनी भी हों, अगर लक्ष्य पर नजर और मन में विश्वास हो, तो हर सपना सच हो सकता है।

About admin

Check Also

सियासी टकराव: फिर आमने-सामने आए रविंद्र सिंह भाटी और हरीश चौधरी

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर तनातनी खुलकर सामने आ गई है। कुछ दिन …

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Channel 009
help Chat?