पांचवें टेस्ट में भारतीय टीम ने इंग्लैंड को रोमांचक मुकाबले में 6 रनों से हराकर सीरीज 2-2 से बराबर कर ली। यह मैच आख़िरी ओवरों तक सांस रोक देने वाला रहा। भारत की जीत के असली हीरो प्रसिद्ध कृष्णा और मोहम्मद सिराज रहे, जिन्होंने दबाव भरे समय में शानदार गेंदबाज़ी की।
खास बात ये है कि एक अंपायरिंग विवाद अगर न होता, तो शायद इंग्लैंड की हार का अंतर 6 रन से कम भी हो सकता था। चलिए पूरी कहानी समझते हैं।
मैच के पांचवें दिन इंग्लैंड को जीत के लिए 35 रनों की ज़रूरत थी और उसके 4 विकेट शेष थे। दूसरी ओर भारत को जीत के लिए सिर्फ 4 विकेट चाहिए थे। मुकाबला लगातार रोमांचक होता जा रहा था और अंपायर्स पर भी दबाव साफ दिख रहा था। 81वां ओवर प्रसिद्ध कृष्णा कर रहे थे। उन्होंने ओवर की चौथी गेंद इंग्लिश बल्लेबाज़ जॉश टंग को डाली, जो लेंथ डिलीवरी थी। गेंद उनकी जांघ के ऊपर लगी और टंग भागकर रन लेने लगे। उन्होंने रन पूरा भी कर लिया था, लेकिन तभी अंपायर अहसान रज़ा ने उन्हें LBW आउट दे दिया।
जॉश टंग ने तुरंत DRS लेने का फैसला किया। रीप्ले में साफ दिखाई दिया कि गेंद ऑफ स्टंप के बाहर से निकल रही थी और अधिक ऊपर जा रही थी, यानी वह LBW नहीं थे। थर्ड अंपायर ने फैसला पलटते हुए उन्हें नॉट आउट घोषित कर दिया। अब असली विवाद यहीं से शुरू होता है। जब अंपायर ने टंग को आउट दिया था, उसी समय गेंद “डेड” मान ली गई थी। क्रिकेट के नियमों के अनुसार, जैसे ही अंपायर आउट देने के लिए उंगली उठाता है, गेंद DEAD हो जाती है और उस गेंद पर लिए गए रन अमान्य हो जाते हैं।
यही कारण है कि टंग और उनके साथी द्वारा लिया गया 1 रन स्कोर में नहीं जोड़ा गया। अगर ये रन जुड़ जाते, तो आख़िर में इंग्लैंड की हार 6 की जगह 5 रनों से होती।
क्या इससे मैच बदल सकता था?
हां, मैच का नतीजा तो शायद नहीं बदलता क्योंकि भारत लगातार दबाव बना रहा था, लेकिन हार का अंतर जरूर कम हो सकता था। ऐसे नाज़ुक मौकों पर अंपायर की छोटी सी गलती भी मैच की रोमांचकता को बढ़ा देती है।
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