हिण्डोली और नैनवां:
राज्य सरकार जहां एक ओर “वंदे गंगा अभियान” के तहत जल संरक्षण को बढ़ावा दे रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर कई सरकारी दफ्तरों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम ही मौजूद नहीं है।
कई दफ्तरों में नहीं है पानी बचाने की व्यवस्था
हिण्डोली क्षेत्र के उपखंड अधिकारी कार्यालय, पंचायत समिति, जल संसाधन विभाग, शिक्षा विभाग, चिकित्सा भवन, विद्युत निगम और निर्माण विभाग जैसे कई सरकारी संस्थानों में या तो वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम है ही नहीं, या फिर जो लगे थे, वे अब खराब हो चुके हैं।
कुछ स्थानों पर पहले यह सिस्टम लगाए गए थे, लेकिन देखरेख और मरम्मत नहीं होने की वजह से अब वे बिल्कुल बेकार पड़े हैं। नतीजतन, बारिश का कीमती पानी नालों और सड़कों में बहकर बर्बाद हो रहा है।
ग्राम पंचायत भवन और नगरपालिका में भी हाल बेहाल
सूत्रों के मुताबिक, ग्राम पंचायत और नगरपालिका भवनों में भी जल संरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं है। जिन भवनों में पुराना सिस्टम लगा है, वह भी देखरेख के अभाव में खराब हो चुका है। इससे राज्य सरकार की जल संरक्षण की कोशिशों को झटका लग रहा है।
नैनवां: अस्पताल में बना सिस्टम भी नहीं हो रहा उपयोगी
उपजिला चिकित्सालय में भी हाल खराब
नैनवां के उपजिला चिकित्सालय में वर्षा जल संकलन के लिए हार्वेस्टिंग सिस्टम बनाया गया था, लेकिन अब वह भी टूट-फूट की हालत में है।
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छत से पानी ले जाने वाले पाइप टूट चुके हैं
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नालियां कचरे और पत्थरों से भर गई हैं
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पानी टांकों तक पहुंचने की बजाय परिसर में फैल जाता है
तीन टांके बने, लेकिन इस्तेमाल नहीं हो रहा
चिकित्सालय के पीछे तीन बड़े टांके बने हुए हैं, ताकि बरसाती पानी जमा हो सके। लेकिन अब सिर्फ कुछ ही पाइपों से पानी इन टांकों तक पहुंच पाता है। बाकी पानी सड़क और नालों में बहकर चला जाता है।
भवन के चारों ओर करीब 36 पाइप लगे हैं, लेकिन 10 से भी कम पाइपों से पानी टांकों तक पहुंचता है। शेष पानी परिसर में जमा होकर बाहर निकल जाता है।
अवरुद्ध नालियों से बह रहा पानी
जहां पानी टांकों तक जाना चाहिए, वहां की नालियां बंद पड़ी हैं। ऐसे में जब बरसात होती है, तो पानी उफनकर सड़क पर फैल जाता है। इससे अस्पताल परिसर में भी जलभराव हो जाता है और भूजल स्तर बढ़ाने का मकसद अधूरा रह जाता है।
निष्कर्ष:
अगर सरकारी दफ्तर और संस्थान जिम्मेदारी से काम करें, तो जल संरक्षण के प्रयास सफल हो सकते हैं। पुराने सिस्टमों की मरम्मत और नए सिस्टमों की स्थापना से भूजल स्तर में बढ़ोतरी हो सकती है, जो आने वाले समय में पानी की समस्या का समाधान बन सकता है।
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