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अजमेर के व्यापारियों ने तुर्की से तोड़ा कारोबार, अब कश्मीरी सेब को दी जा रही प्राथमिकता

19 मई 2025 | अजमेर संवाददाता

राजस्थान के अजमेर में फल व्यापारियों ने तुर्की से आने वाले सेब और अन्य फलों का आयात पूरी तरह बंद कर दिया है। अब स्थानीय बाजारों में कश्मीरी सेब की मांग तेजी से बढ़ी है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि भारत-पाक संबंधों में आए तनाव और तुर्की की पाकिस्तान-समर्थक नीति का असर व्यापार पर भी पड़ा है।

तुर्की से मोहभंग, कश्मीर की ओर झुकाव

स्थानीय फल व्यापारी अर्जुन कुमार ने बताया कि, “हमने तुर्की से सेब और कीवी का आयात पूरी तरह रोक दिया है। अब ग्राहक भी तुर्की के बजाय देशी फलों, खासतौर पर कश्मीरी सेब को तरजीह दे रहे हैं।” अर्जुन के अनुसार, यह निर्णय सिर्फ व्यापारिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय भावना से प्रेरित है।

तुर्की के खिलाफ नाराजगी क्यों?

यह प्रतिक्रिया उस समय तेज हुई जब तुर्की ने कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान का खुला समर्थन किया। तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ से फोन पर बात कर कश्मीर पर अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग का समर्थन किया था। इसके साथ ही तुर्की ने भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की आलोचना की और पाकिस्तान को ड्रोन व हथियारों की आपूर्ति भी की।

राजनीतिक स्थिति का व्यापार पर प्रभाव

व्यापारिक हलकों में तुर्की की इस नीति को भारत विरोधी रवैये के रूप में देखा जा रहा है। कई संगमरमर और फल व्यापारियों ने तुर्की से अपने रिश्ते खत्म कर दिए हैं। व्यापारियों का कहना है कि तुर्की और पाकिस्तान के धार्मिक व रणनीतिक गठबंधन का असर अब कारोबार पर पड़ रहा है और इसके जवाब में वे अब ‘वोकल फॉर लोकल’ सिद्धांत को अपनाकर भारतीय उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।

भारतीय-तुर्की रिश्तों में तनाव

भारत और तुर्की के संबंध बीते कुछ वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं। विशेष रूप से कश्मीर को लेकर तुर्की की आलोचनात्मक टिप्पणी और पाकिस्तान के समर्थन ने इस रिश्ते को और खराब किया है। वहीं, भारत के इसराइल, ग्रीस और साइप्रस जैसे तुर्की-विरोधी माने जाने वाले देशों से मजबूत होते संबंध भी इस दूरी का एक कारण माने जा रहे हैं।


निष्कर्ष:
राजस्थान के अजमेर में तुर्की के सेब की जगह अब ‘स्वदेशी कश्मीर’ की मिठास खरीदी जा रही है। यह बदलाव सिर्फ स्वाद का नहीं, बल्कि भावनाओं और देशभक्ति का प्रतीक बन चुका है।

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