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अफगानिस्तान में एक बार फिर भूकंप के झटके, लोग दहशत में घरों से बाहर निकले

काबुल: अफगानिस्तान में शनिवार सुबह फिर से धरती कांपी। रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 4.5 मैग्नीट्यूड दर्ज की गई। भले ही यह तीव्रता विनाशकारी न मानी जाए, लेकिन पुराने और कमजोर ढांचे वाले इलाकों में नुकसान की आशंका बनी रहती है। भूकंप के बाद कई इलाकों में लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए।

गहराई में था केंद्र, झटकों से मची हलचल
नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, इस बार भूकंप का केंद्र पृथ्वी की सतह से 120 किलोमीटर नीचे था। इससे पहले 19 मई, 18 मई और 17 मई को भी अफगानिस्तान में क्रमश: 4.2, 4.5 और 4.2 तीव्रता के भूकंप दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले कुछ दिनों में लगातार भूकंप आना इस क्षेत्र की भूगर्भीय सक्रियता को दर्शाता है।


क्यों आता है अफगानिस्तान में बार-बार भूकंप?

अफगानिस्तान भूगर्भीय दृष्टि से अत्यधिक सक्रिय क्षेत्र में आता है। हिंदू कुश पर्वतमाला के नीचे फैली फॉल्ट लाइनों और टेक्टोनिक प्लेट्स के आपसी टकराव के कारण यहां बार-बार भूकंप की घटनाएं होती रहती हैं। विशेष रूप से भारतीय और यूरेशियन प्लेट्स के मिलन बिंदु पर स्थित होने के कारण यह इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिए संवेदनशील माना जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हेरात समेत देश के कई हिस्से इन फॉल्ट लाइनों से प्रभावित हैं। यही वजह है कि भूकंप यहां सामान्य घटनाओं की तरह देखे जाते हैं।


प्राकृतिक आपदाओं के लिए पहले से ही संवेदनशील है अफगानिस्तान

संयुक्त राष्ट्र की मानवीय सहायता एजेंसी (UNOCHA) का कहना है कि अफगानिस्तान न केवल भूकंप बल्कि बाढ़ और भूस्खलन जैसी अन्य प्राकृतिक आपदाओं से भी लगातार जूझता रहा है। दशकों से जारी संघर्ष, आर्थिक तंगी और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यहां के लोग ऐसे झटकों से निपटने में असमर्थ होते जा रहे हैं।

UNOCHA के अनुसार, हालिया भूकंपों ने पहले से संकटग्रस्त समुदायों की परेशानियों को और बढ़ा दिया है। भूकंप न केवल मकानों को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि लोगों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका पर भी गहरा प्रभाव डालते हैं।


निष्कर्ष: छोटी तीव्रता, बड़ी चेतावनी

हालांकि हालिया भूकंप की तीव्रता ज्यादा नहीं थी, लेकिन यह स्पष्ट करता है कि अफगानिस्तान एक बार फिर एक बड़े भूगर्भीय खतरे की ओर बढ़ रहा है। भले ही जान-माल का तत्काल बड़ा नुकसान नहीं हुआ, पर लगातार आने वाले झटके एक चेतावनी हैं — बेहतर तैयारी और आपदा प्रबंधन की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा है।

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