ब्रासीलिया/मनाउस:
ब्राजील की संसद इस सप्ताह एक ऐसे विधेयक को पारित करने की तैयारी में है, जिसे पर्यावरणविदों ने ‘विनाश का विधेयक’ (Bill of Devastation) करार दिया है। यह विधेयक देश की मौजूदा पर्यावरणीय लाइसेंसिंग प्रणाली को लगभग समाप्त कर देगा, जिससे अमेज़न वर्षावन के अस्तित्व पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।
हालांकि राष्ट्रपति लुइज़ इनेसियो लूला दा सिल्वा सार्वजनिक रूप से पर्यावरण संरक्षण की बात करते हैं, लेकिन इस विधेयक को लेकर उनकी चुप्पी को “मौन समर्थन” माना जा रहा है। यदि लूला इस पर वेटो भी करते हैं, तब भी विधेयक को पारित करने के लिए संसद में पर्याप्त समर्थन मौजूद है।
‘स्व-लाइसेंसिंग’ की खतरनाक छूट
विधेयक का मुख्य उद्देश्य यह दिखाया गया है कि यह “कम प्रभाव वाले” प्रोजेक्ट्स के लिए अनावश्यक नियमों को सरल बनाएगा। लेकिन असल में यह ‘कम’ और ‘मध्यम’ प्रभाव वाले प्रोजेक्ट्स के लिए लाइसेंसिंग प्रक्रिया को खत्म करता है।
यह प्रोजेक्ट्स अब खुद ही ऑनलाइन चेकलिस्ट भरकर लाइसेंस ले सकेंगे — बिना किसी सार्वजनिक सुनवाई, पर्यावरणीय मूल्यांकन या आपातकालीन तैयारी की शर्तों के।
यह वही ‘मध्यम प्रभाव’ श्रेणी है जिसमें 2015 की मारियाना और 2019 की ब्रुमाडिन्हो जैसी विनाशकारी खनन दुर्घटनाएं आती हैं।
‘विशेष पर्यावरण लाइसेंस’ का खतरा
सीनेट में मतदान से ठीक पहले, विधेयक में एक संशोधन जोड़ दिया गया, जिससे इसे और अधिक खतरनाक बना दिया गया।
अब कोई भी प्रोजेक्ट जिसे “रणनीतिक” घोषित किया जाए, वह तेज़-ट्रैक अनुमोदन प्राप्त कर सकेगा — चाहे उसका प्रभाव कितना भी गंभीर क्यों न हो।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रावधान अमेज़न डेल्टा में प्रस्तावित तेल परियोजना को मंजूरी दिलाने के लिए लाया गया है।
जलवायु और अमेज़न: दोहरी तबाही के कगार पर
ब्राजील और विश्व दोनों एक गंभीर जलवायु संकट के मुहाने पर खड़े हैं।
यदि अमेज़न वर्षावन का पतन होता है, तो यह ग्लोबल वार्मिंग को उस स्तर तक पहुँचा सकता है, जहां से वापस लौटना संभव नहीं होगा। इसके साथ ही, बढ़ते तापमान और वर्षा चक्र में बदलाव अमेज़न के “वाष्प उड़ान नदी” (flying rivers) तंत्र को नष्ट कर सकते हैं — जो ब्राज़ील की खेती और पीने के पानी की व्यवस्था के लिए जीवनरेखा है।
तेल परियोजना और ‘ऊर्जा सुरक्षा’ का भ्रम
ब्राजील की सरकारी तेल कंपनी पेट्रोब्रास और कई मंत्री दावा कर रहे हैं कि अमेज़न के मुहाने पर तेल उत्खनन “ऊर्जा सुरक्षा” के लिए ज़रूरी है।
लेकिन तथ्य यह है कि ब्राजील पहले से ही अपने निकाले गए तेल का आधे से ज़्यादा हिस्सा निर्यात करता है, और इस प्रस्तावित परियोजना से केवल निर्यात और मुनाफा बढ़ेगा — ऊर्जा सुरक्षा से इसका कोई संबंध नहीं है।
इससे भी अधिक चिंताजनक यह है कि प्रस्तावित स्थल की गहराई और समुद्री धाराएं इतनी जटिल हैं कि यदि कोई तेल रिसाव हुआ, तो उसे महीनों या वर्षों तक रोका नहीं जा सकेगा।
लूला की खामोशी: एक नींद में चलता नेतृत्व
राष्ट्रपति लूला ने पर्यावरण मंत्री की चेतावनियों को अनदेखा करते हुए खुद को ऐसे सलाहकारों से घेर लिया है जो पर्यावरणीय रूप से विनाशकारी परियोजनाओं को आगे बढ़ा रहे हैं — जैसे कि BR-319 राजमार्ग या तेल उत्खनन परियोजनाएं।
क्या लूला समय रहते जागेंगे और COP-30 (नवंबर 2025) से पहले वैश्विक नेतृत्व की भूमिका अपनाएंगे?
फिलहाल इसके कोई संकेत नहीं हैं, लेकिन जनदबाव और वैज्ञानिक चेतावनियों के माध्यम से प्रयास ज़ारी रखने होंगे।
निष्कर्ष
जलवायु संकट से लड़ाई में ब्राजील की भूमिका निर्णायक हो सकती है। लेकिन यदि यह विधेयक पारित हो गया, तो अमेज़न वर्षावन का भविष्य और वैश्विक जलवायु स्थिरता दोनों दांव पर लग जाएंगे।
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