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अमेरिका-चीन व्यापार समझौते की उम्मीद जगी, लंदन में 9 जून को होगी अहम बैठक

लंदन/वॉशिंगटन: वैश्विक व्यापार जगत की नजरें अब 9 जून 2025 को होने वाली एक महत्वपूर्ण बैठक पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और चीन के शीर्ष प्रतिनिधि लंदन में मिलकर एक संभावित व्यापार समझौते पर चर्चा करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बैठक की घोषणा अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ के माध्यम से की है।


कौन होंगे अमेरिकी प्रतिनिधि?

राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि अमेरिका की ओर से इस बैठक में वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट, वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर हिस्सा लेंगे। बैठक का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार तनाव को दूर करना और एक स्थायी समझौते की दिशा में बढ़ना है।


शी जिनपिंग से फोन पर बातचीत के बाद बढ़ी उम्मीद

इस बैठक की पृष्ठभूमि में हाल ही में ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई लगभग 90 मिनट की टेलीफोन बातचीत अहम मानी जा रही है। ट्रंप ने इस संवाद को “रचनात्मक और सकारात्मक” बताया और कहा कि दोनों देशों की टीमें अब ज़मीनी स्तर पर समाधान खोजने के लिए सक्रिय होंगी।

रेयर अर्थ मेटल्स (दुर्लभ खनिजों) के व्यापार को लेकर भी चर्चा हुई और ट्रंप ने कहा कि इस मुद्दे पर तनाव कम हुआ है


पिछली डील और अधूरे मुद्दे

गौरतलब है कि 12 मई 2025 को अमेरिका और चीन के बीच एक 90-दिन की अस्थायी डील हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर लगाए गए आयात शुल्क में काफी कमी की थी।

  • अमेरिका ने चीनी उत्पादों पर टैरिफ को 145% से घटाकर 30% किया।

  • चीन ने अमेरिकी सामान पर टैक्स को 125% से घटाकर 10% किया।

हालांकि यह समझौता केवल टैक्स तक सीमित रहा और फेंटानिल ड्रग्स, ताइवान की स्थिति, तथा AI तकनीक और चिप्स पर नियंत्रण जैसे प्रमुख मसलों पर कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया।


चीन का आरोप: अमेरिका नियमों का उल्लंघन कर रहा

बीते हफ्ते चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका पर समझौते को तोड़ने का आरोप लगाया। उनके अनुसार:

  • AI चिप्स के निर्यात पर नए प्रतिबंध,

  • चिप डिज़ाइन सॉफ़्टवेयर की बिक्री पर रोक,

  • और चीनी छात्रों के वीजा रद्द करना — ये सभी अमेरिका की “भेदभावपूर्ण नीति” को दर्शाते हैं।

चीन का कहना है कि अमेरिका समझौते की भावना के अनुरूप नहीं चल रहा।


क्या 9 जून की बैठक बनेगी मील का पत्थर?

अब सबकी नजरें लंदन बैठक पर हैं, जो अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध को कम करने और स्थिर वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा में अहम कड़ी बन सकती है। हालांकि इसमें केवल व्यापार नहीं, बल्कि कूटनीति, तकनीकी नियंत्रण, और वैश्विक शक्ति संतुलन भी दांव पर लगे हुए हैं।

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