वॉशिंगटन डीसी से लेकर लॉस एंजिल्स तक प्रदर्शन, सड़कों पर उतरी जनता, सैन्य बल की तैनाती
डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ अमेरिका में भारी जनविरोध फूट पड़ा है। देश के कई बड़े शहरों में विरोध-प्रदर्शन ने हिंसक रूप ले लिया है। न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स और सैन फ्रांसिस्को जैसे प्रमुख शहरों में हज़ारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं, और कुछ जगहों पर हालात इतने बिगड़े कि नेशनल गार्ड को मोर्चा संभालना पड़ा।
अप्रवासन नीति बनी विरोध की जड़
इस विरोध की सबसे बड़ी वजह है ट्रंप प्रशासन की सख्त अवैध अप्रवासन नीति। हाल ही में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की कार्रवाई के तहत लॉस एंजिल्स में 100 से ज़्यादा अप्रवासियों को हिरासत में लिया गया, जिसके बाद गुस्साई भीड़ ने आगजनी और पथराव शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह नीति न केवल अमानवीय है, बल्कि इससे अमेरिका की बहुसांस्कृतिक पहचान को भी खतरा है।
सड़कों पर सेना, बख्तरबंद वाहन और आंसू गैस
बढ़ते तनाव के चलते लॉस एंजिल्स और कैलिफोर्निया में 2000 से अधिक नेशनल गार्ड की तैनाती की गई है। शहर में बख्तरबंद गाड़ियों की मौजूदगी और हथियारबंद सैनिकों की गश्त ने माहौल को और तनावपूर्ण बना दिया है। कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें हुईं, जिनमें आंसू गैस के गोले और बल प्रयोग देखने को मिला।
गवर्नर न्यूसम का विरोध
कैलिफोर्निया के गवर्नर गैविन न्यूसम ने ट्रंप के कदमों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि सैन्य तैनाती से हालात शांत नहीं होंगे, बल्कि और भड़केंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ट्रंप जानबूझकर स्थिति को उग्र रूप दे रहे हैं ताकि राजनीतिक लाभ उठाया जा सके। न्यूसम के अनुसार, “यह कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं, बल्कि एक मानवीय संकट है, जिसे बल से नहीं, समझदारी से सुलझाया जाना चाहिए।”
ट्रंप की चेतावनी और सख्त लहजा
वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने विरोध प्रदर्शनों को “देश की एकता के खिलाफ साज़िश” बताया है और साफ संकेत दिए हैं कि प्रशासन और सख्ती से निपटेगा। उन्होंने स्थानीय प्रशासन को आड़े हाथों लिया और कहा कि “कानून और व्यवस्था की बहाली हमारी पहली प्राथमिकता है।”
क्या अमेरिका में गहराता जा रहा है विभाजन?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे ने अमेरिकी समाज में पहले से मौजूद ध्रुवीकरण को और गहरा कर दिया है। ट्रंप समर्थकों और विरोधियों के बीच टकराव की स्थिति बन चुकी है। सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने अमेरिका को एक बार फिर नस्लीय, सांस्कृतिक और वैचारिक टकराव की ओर धकेल दिया है?
निष्कर्ष:
ट्रंप प्रशासन की कड़ी नीतियों और सैन्य प्रतिक्रिया ने अमेरिका को फिर से सामाजिक उथल-पुथल के दौर में ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह साफ हो जाएगा कि ये विरोध लहर एक अस्थायी प्रतिक्रिया है या फिर ट्रंप के राजनीतिक करियर के लिए गंभीर चुनौती।
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