मध्य-पूर्व में तनाव फिर से उभर रहा है और इस बार केंद्र में हैं — इजराइल का परमाणु कार्यक्रम और ईरान की खुफिया एजेंसियों का चौंकाने वाला दावा। ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब ने हाल ही में कहा है कि उनके देश ने इजराइल से जुड़ी गोपनीय परमाणु फाइलों का एक बड़ा जखीरा जब्त किया है। ये फाइलें कथित तौर पर इजराइल के परमाणु हथियार कार्यक्रम से जुड़ी रणनीतिक और वैज्ञानिक जानकारियां समेटे हुए हैं।
बयान आया, सबूत नहीं
खातिब ने इस बात की पुष्टि की कि उनके मंत्रालय ने इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था को भेदते हुए ये दस्तावेज हासिल किए और अब उन्हें ईरान लाया जा चुका है। उन्होंने दावा किया कि “उचित समय पर” इन जानकारियों को सार्वजनिक किया जाएगा। हालांकि, उन्होंने इस कथित ऑपरेशन के समर्थन में कोई दृश्य या दस्तावेजी प्रमाण नहीं प्रस्तुत किया।
ईरानी सरकारी टीवी चैनल ने भी इस कथित खुफिया ऑपरेशन की पुष्टि की, लेकिन वहां भी तथ्यात्मक साक्ष्य नदारद रहे। इजराइल की तरफ से भी इस दावे पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
2018 की ‘रेड फाइल्स’ का जवाब?
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ईरान का यह दावा 2018 की उस बड़ी घटना की ‘राजनीतिक प्रतिक्रिया’ हो सकता है जब इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुले मंच से यह कहा था कि उनके एजेंटों ने तेहरान से ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी सैकड़ों फाइलें चुरा ली थीं। उस खुलासे ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी को चौंका दिया था। अब शायद ईरान यह दिखाना चाहता है कि वह भी जवाबी वार करने में सक्षम है।
IAEA की बैठक से पहले दबाव की रणनीति?
ईरानी खुफिया मंत्री का बयान ऐसे समय में आया है जब इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA) की महत्वपूर्ण बैठक होने वाली है। इस बैठक में यूरोपीय और पश्चिमी देशों के दबाव में ईरान को ‘असहयोगी राष्ट्र’ घोषित किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह मामला संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद तक जा सकता है — और इससे ईरान पर सख्त अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध दोबारा लग सकते हैं।
परमाणु समझौते की बातचीत भी ठप
ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ता भी इस समय ठंडी पड़ गई है। अमेरिका ने हाल में जो प्रस्ताव रखा था, उसे ईरान ने नकारने के संकेत दिए हैं। यदि वार्ता विफल रहती है, तो अक्टूबर के बाद से पूर्ववर्ती प्रतिबंधों को दोबारा लागू करना पश्चिमी देशों के लिए मुश्किल हो जाएगा।
क्या बढ़ सकता है टकराव का खतरा?
ईरान फिलहाल 60% तक यूरेनियम संवर्धन कर चुका है, जबकि हथियार निर्माण के लिए 90% स्तर पर्याप्त माना जाता है। विशेषज्ञों को आशंका है कि अगर ईरान पूरी तरह से IAEA से अलग हो गया और हथियार निर्माण की दिशा में बढ़ा, तो इजराइल या अमेरिका सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकते हैं।
अभी अनुमान, प्रमाण नहीं
ईरान का दावा, अगर प्रमाणित होता है, तो यह इजराइल की सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर झटका होगा। लेकिन जब तक इन दस्तावेजों को सामने लाकर अंतरराष्ट्रीय जांच एजेंसियों को सौंपा नहीं जाता, तब तक इसे एक राजनीतिक चाल और अंतरराष्ट्रीय दबाव को मोड़ने की कोशिश के रूप में ही देखा जा रहा है।
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