पाकिस्तान की राजनीति एक बार फिर बड़े मोड़ पर खड़ी है। 11 जून 2025 को इस्लामाबाद हाईकोर्ट में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और उनकी पत्नी बुशरा बीबी की याचिकाओं पर सुनवाई होगी। अल-कादिर ट्रस्ट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के इस चर्चित केस में उन्हें ज़मानत मिलने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
72 वर्षीय इमरान खान अगस्त 2023 से अदियाला जेल में हैं। उनके खिलाफ कई केस दर्ज हैं, लेकिन अल-कादिर ट्रस्ट मामला सबसे हाई-प्रोफाइल माना जा रहा है। इस केस में पूर्व प्रधानमंत्री और उनकी पत्नी पर गंभीर अनियमितताओं और सत्ता का दुरुपयोग करने के आरोप हैं।
क्या है अल-कादिर ट्रस्ट केस?
यह विवाद यूनाइटेड किंगडम की नेशनल क्राइम एजेंसी (NCA) द्वारा पाकिस्तानी रियल एस्टेट कारोबारी मलिक रियाज के परिवार से जब्त की गई 190 मिलियन पाउंड की रकम से जुड़ा है। आरोपों के मुताबिक, इमरान खान की सरकार ने यह रकम राष्ट्रीय खजाने में जमा करने के बजाय मलिक रियाज की कंपनी बहरिया टाउन की देनदारियों के निपटान में इस्तेमाल की।
इसके बदले मलिक रियाज ने कथित तौर पर अल-कादिर ट्रस्ट को कराची के पास कीमती जमीन दान कर दी, जिसके ट्रस्टी इमरान खान और बुशरा बीबी हैं। नैशनल अकाउंटेबिलिटी ब्यूरो (NAB) ने इस लेन-देन को संदिग्ध मानते हुए भ्रष्टाचार और धोखाधड़ी की जांच शुरू की।
जमानत की उम्मीद और राजनीतिक रणनीति
पीटीआई के वरिष्ठ नेता और वकील गौहर अली खान ने उम्मीद जताई है कि अदालत 11 जून को राहत दे सकती है। उनका मानना है कि कानूनी प्रक्रिया अब निष्पक्ष रास्ते पर बढ़ रही है, जिससे इमरान और बुशरा बीबी दोनों को न्याय मिल सकता है।
उन्होंने यह भी बताया कि इमरान खान जेल से ही विपक्षी दलों के साथ मिलकर केंद्र सरकार के खिलाफ एक नया आंदोलन शुरू करने की तैयारी में हैं। पीटीआई ने बजट सत्र के दौरान एक विशेष रणनीति भी तैयार की है, जिसकी घोषणा 9 जून को प्रेस कॉन्फ्रेंस में की जाएगी।
बुशरा बीबी को लेकर आरोप
गौहर अली खान का दावा है कि बुशरा बीबी को जेल भेजने के पीछे असल मकसद इमरान खान पर दबाव बनाना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पार्टी किसी “बैकडोर डील” के पक्ष में नहीं है और न्यायिक प्रक्रिया में पूरा विश्वास रखती है।
सरकार और विपक्ष के बीच संवाद के संकेत
प्रधानमंत्री के विशेष सलाहकार राणा सनाउल्लाह ने हाल ही में चुनाव सुधारों को लेकर पीटीआई को बातचीत की पेशकश की है। हालांकि पीटीआई इस समय अपने कानूनी मोर्चे और आंदोलन पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
11 जून: एक निर्णायक दिन
अब निगाहें इस्लामाबाद हाईकोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं, जो इमरान खान और बुशरा बीबी की रिहाई का रास्ता खोल सकती है — या उनके खिलाफ कानूनी शिकंजे को और कस सकती है। यह फैसला न केवल इमरान खान की व्यक्तिगत स्वतंत्रता, बल्कि पाकिस्तान की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकता है।
CHANNEL009 Connects India
