मुस्लिम बहुल देशों को प्रमुखता से शामिल किया गया, ट्रंप ने दी “राष्ट्रीय सुरक्षा” की दलील
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित नया यात्रा प्रतिबंध आज से लागू हो गया है, जिसके तहत 12 देशों के नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। यह नीति मुख्य रूप से अफ्रीका और मध्य पूर्व के देशों को प्रभावित करती है, और इसके पीछे ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा को कारण बताया है।
किन देशों पर लगी है रोक?
नए प्रतिबंध के दायरे में निम्नलिखित देश शामिल हैं:
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अफगानिस्तान
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म्यांमार
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चाड
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कांगो गणराज्य
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इक्वेटोरियल गिनी
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इरिट्रिया
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हैती
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ईरान
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लीबिया
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सोमालिया
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सूडान
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यमन
इसके अतिरिक्त, बुरुंडी, क्यूबा, लाओस, सिएरा लियोन, टोगो, तुर्कमेनिस्तान और वेनेजुएला जैसे देशों के उन नागरिकों को भी अमेरिका में प्रवेश नहीं मिलेगा, जो अमेरिका से बाहर हैं और जिनके पास वैध वीजा नहीं है।
ट्रंप का पक्ष: ‘देश की सुरक्षा सर्वोपरि’
पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप का कहना है कि यह प्रतिबंध धार्मिक आधार पर नहीं, बल्कि संभावित सुरक्षा खतरों को रोकने के लिए लगाया गया है। हालांकि, आलोचकों का मानना है कि इसमें मुस्लिम बहुल देशों को disproportionately निशाना बनाया गया है।
ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी जनवरी 2017 में एक विवादास्पद आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें 7 मुस्लिम देशों के नागरिकों की अमेरिका यात्रा पर प्रतिबंध लगा था। उस समय इसे व्यापक विरोध और कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा, मगर 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने एक संशोधित आदेश को मंजूरी दे दी थी।
न्यायपालिका से फिर टकराव
नई नीति के चलते अमेरिका की न्यायपालिका और ट्रंप के बीच टकराव की स्थिति फिर बन गई है। संघीय जजों ने इस फैसले को कार्यकारी शक्तियों के दुरुपयोग के रूप में देखा है, जबकि ट्रंप प्रशासन इसे देश की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम बता रहा है।
कौन होंगे सबसे अधिक प्रभावित?
इस आदेश से सबसे अधिक प्रभावित वे लोग होंगे:
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जो इन प्रतिबंधित देशों में रह रहे हैं,
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जिनके पास अमेरिका आने के लिए वैध वीजा नहीं है,
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या जो अमेरिका में शरण की उम्मीद कर रहे थे।
ईरान, सोमालिया, यमन, सूडान और लीबिया जैसे देश इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। साथ ही, कुछ वेनेजुएला के सरकारी अधिकारियों और उनके परिवारों को भी इस बैन के दायरे में लाया गया है।
निष्कर्ष
डोनाल्ड ट्रंप का यह नया ट्रैवल बैन न सिर्फ उनके पहले कार्यकाल की विवादास्पद नीतियों की वापसी है, बल्कि अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर जारी बहस और ध्रुवीकरण को भी एक बार फिर सामने लाता है। अब देखना होगा कि यह नीति कानूनी और राजनीतिक मोर्चों पर कितना टिकती है।
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