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राजस्थान के अलवर जिले में हरियाली बढ़ाने की योजना के नाम पर करीब 18 करोड़ रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। यह खुलासा आरटीआई के जरिए सामने आई करीब 300 पेज की जांच रिपोर्ट में हुआ है। रिपोर्ट में वन विभाग के कुछ अधिकारियों पर फर्जी समितियां बनाकर सरकारी पैसे के दुरुपयोग के आरोप लगाए गए हैं।
कई अधिकारियों के नाम आए सामने
इस मामले में तत्कालीन अलवर डीएफओ अपूर्व कृष्ण श्रीवास्तव, डीएफओ राजेंद्र हुड्डा, राजगढ़ के तत्कालीन क्षेत्रीय वन अधिकारी दीपक मीणा और एक प्रभारी वनपाल के नाम सामने आए हैं। जांच रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015-16 से 2024-25 के बीच सेल्फ चेक के जरिए सरकारी राशि में अनियमितता की गई।
यह जांच मुख्य वन संरक्षक जयपुर राजीव चतुर्वेदी के नेतृत्व में गठित समिति ने की थी। रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
फर्जी समितियों के जरिए किया गया घोटाला
जांच में पाया गया कि राजगढ़ रेंज में मिट्टी कार्य और पौधरोपण के लिए 7 ग्राम वन सुरक्षा एवं प्रबंध समितियों का गठन अवैध तरीके से किया गया था। इन समितियों के माध्यम से करीब 15 करोड़ 54 लाख 78 हजार रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई।
इसके अलावा राजगढ़ रेंज में अन्य कार्यों के नाम पर भी 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि के दुरुपयोग की बात सामने आई है।
जांच समिति की सिफारिश
जांच समिति ने इस पूरे मामले में राशि की वसूली, दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सीबीआई जांच कराने की सिफारिश वन मुख्यालय से की है।
वन विभाग का बयान
अलवर वन मंडल के डीएफओ राजेंद्र कुमार हुड्डा ने कहा कि यह पुराना मामला है और इसकी जांच अभी चल रही है। सरकार से जो भी निर्देश मिलेंगे, उनके अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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