राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले को लेकर एक संवेदनशील कदम उठाते हुए इस वर्ष 3 मई को अपना जन्मदिन नहीं मनाने का निर्णय लिया है।
गहलोत ने इस निर्णय की घोषणा अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर की और कहा कि इस मुश्किल वक्त में जश्न का कोई स्थान नहीं है। उन्होंने कहा कि इस हमले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है, और जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उनकी पीड़ा को शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता।
‘पीड़ा इतनी गहरी है कि मन उत्सव नहीं चाहता’
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि बैसरन घाटी में जो भयावह मंजर देखने को मिला, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला था। उन्होंने लिखा, “जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को अपनी आंखों के सामने खो दिया, उनकी मन:स्थिति की कल्पना मात्र से ही मन व्याकुल हो उठता है।”
सेवा और संवेदना का आग्रह
गहलोत ने अपने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे इस दिन को सेवा और मानवीय सहयोग के रूप में मनाएं। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि कोई कार्यक्रम पहले से तय किया गया है, तो उसे केवल रक्तदान शिविर या अन्य सामाजिक सेवा तक ही सीमित रखा जाए।
जयपुर निवासी पीड़ित के लिए सहायता की मांग
गहलोत ने हाल ही में पहलगाम हमले में जान गंवाने वाले जयपुर निवासी नीरज उधवानी के परिवार के लिए आर्थिक सहायता और उनकी पत्नी को नौकरी देने की भी मांग की है। उन्होंने राज्य सरकार से अपील की कि शोक संतप्त परिवार को सहारा देने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं।
देश के लिए बड़ा घाव बनी पहलगाम की घटना
22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले में 26 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए। यह हमला पिछले कई वर्षों में सबसे घातक माना जा रहा है, जिसमें पर्यटक विशेष रूप से निशाना बने। हमले की भयावहता ने पूरे देश में आक्रोश और शोक की लहर फैला दी है।
निष्कर्ष: अशोक गहलोत का यह फैसला एक संवेदनशील और जिम्मेदार नेता की पहचान कराता है, जो केवल राजनीति तक सीमित न रहकर आमजन के दुख-दर्द को भी आत्मसात करता है।
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