तेल अवीव:
ईरान और इज़रायल के बीच सैन्य टकराव के बीच इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शुक्रवार रात एक बड़ा बयान देते हुए ईरान की जनता से सीधे संवाद किया। उन्होंने ईरान के मौजूदा शासन को “तानाशाही” करार दिया और कहा कि “पिछले पांच दशकों से आपको दबाया गया है, लेकिन अब परिवर्तन का समय आ गया है।”
‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ का समर्थन, जनता से आज़ादी की अपील
प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने संबोधन में कहा,
“ईरान के महान नागरिकों, आप इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य अभियानों में से एक – ऑपरेशन राइजिंग लायन – के बीच में खड़े हैं। यह अभियान सिर्फ हमारे दुश्मनों को कमजोर करने के लिए नहीं, बल्कि आपकी स्वतंत्रता का मार्ग प्रशस्त करने के लिए भी है।”
ईरानी शासन पर तीखा हमला
नेतन्याहू ने कहा कि मौजूदा ईरानी इस्लामिक शासन न केवल अपने ही नागरिकों पर अत्याचार करता रहा है, बल्कि खुलेआम इज़रायल को नष्ट करने की धमकी भी देता आया है।
“यह शासन आपको गुलाम बना रहा है और दुनिया को खतरे में डाल रहा है। अब यह जरूरी हो गया है कि ईरानी नागरिक खुद अपने लिए बेहतर भविष्य की मांग करें।”
इज़रायली सैन्य हमले का उद्देश्य स्पष्ट
इज़रायली पीएम ने यह भी बताया कि ईरान के खिलाफ यह सैन्य कार्रवाई क्यों की जा रही है:
“हमारा मकसद ईरान के परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को निष्क्रिय करना है – ताकि इज़रायल और पूरी दुनिया को इन खतरों से बचाया जा सके।”
नेतन्याहू का बड़ा दावा: “अब और भी बहुत कुछ होगा”
इज़रायली प्रधानमंत्री ने बताया कि बीते 24 घंटों में इज़रायली सेना ने ईरान के प्रमुख सैन्य कमांडरों, वरिष्ठ परमाणु वैज्ञानिकों और मिसाइल भंडार को निशाना बनाकर महत्वपूर्ण कामयाबी हासिल की है।
साथ ही उन्होंने आगाह किया,
“यह सिर्फ शुरुआत है – अब और भी बहुत कुछ होने वाला है।”
क्या यह बदलाव की शुरुआत है?
नेतन्याहू की इस सीधी अपील ने मध्य-पूर्व की जटिल राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। उनका यह बयान स्पष्ट रूप से ईरानी जनता से आग्रह है कि वे अपनी मौजूदा सरकार के खिलाफ आवाज़ उठाएं। अब देखना यह है कि ईरान के भीतर से इस पर कैसी प्रतिक्रिया आती है।
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