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आषाढ़ अमावस्या : दुर्लभ योगों के साथ पितृदोष से मुक्ति का शुभ अवसर

बीना।
हिंदू धर्म में आषाढ़ अमावस्या का बहुत खास महत्व होता है। इस दिन स्नान, दान और व्रत करने से शुभ फल मिलते हैं। माना जाता है कि इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सारे पाप खत्म हो जाते हैं और पितरों को शांति मिलती है।

इस बार खास क्यों है आषाढ़ अमावस्या?

इस बार आषाढ़ अमावस्या 25 जून, मंगलवार को मनाई जा रही है, जो कई दुर्लभ योगों के साथ आई है। इस दिन

  • सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5:25 बजे से 10:40 बजे तक रहेगा।

  • गंड योग सुबह 6 बजे तक रहेगा, उसके बाद वृद्धि योग शुरू होगा, जो 26 जून तड़के 2:39 बजे तक रहेगा।

  • सुबह मृगशिरा नक्षत्र, फिर आर्द्रा नक्षत्र का संयोग रहेगा।

इन सभी योगों के कारण यह अमावस्या बहुत शुभ और फलदायक मानी जा रही है।

कैसे मनाते हैं आषाढ़ अमावस्या?

  • इस दिन व्रतधारी ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करते हैं।

  • सूर्य देव को जल अर्पित करते हैं और तिलांजलि देते हैं।

  • बहती नदी में स्नान करते समय हथेली में तिल रखकर जल में प्रवाहित करते हैं।

  • भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु चालीसा और स्तोत्र का पाठ किया जाता है।

पितरों के लिए खास दिन

  • इस दिन पितरों को जलांजलि देकर उन्हें प्रसन्न किया जाता है।

  • पितृदोष से मुक्ति के लिए दान-पुण्य और तर्पण किया जाता है।

  • नर्मदा तट पर बड़ी संख्या में लोग पितृकर्म के लिए पहुंचते हैं।

  • मान्यता है कि इस दिन पितरों को जलांजलि देने से पिछली भूलों के दोष भी खत्म हो जाते हैं।

निष्कर्ष:
आषाढ़ अमावस्या इस बार कई शुभ योगों के साथ आई है, जिससे यह दिन और भी खास हो गया है। स्नान, दान, व्रत और पितृ तर्पण से व्यक्ति को पुण्य फल मिलता है और पितृदोष से राहत मिलती है।

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