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सीकर। खाटूश्यामजी में आयोजित बाबा श्याम के फाल्गुनी लक्खी मेले में इस साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पहली बार आठ दिन तक चले इस मेले में करीब 19 लाख भक्तों ने दर्शन किए, जो एक नया रिकॉर्ड माना जा रहा है। प्रशासन की बेहतर व्यवस्था और नए प्रयोगों के कारण श्रद्धालुओं को जाम और लंबी कतारों से काफी राहत मिली।
पिछले साल 12 दिन चले मेले में करीब 22 लाख भक्त पहुंचे थे, लेकिन इस बार मेले की अवधि कम होने के बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या काफी अधिक रही। खास बात यह रही कि एकादशी के दिन भी भक्तों को दो से तीन घंटे में आसानी से दर्शन हो गए, जबकि पहले कई घंटों तक इंतजार करना पड़ता था।
बेहतर व्यवस्थाओं से बदला मेले का अनुभव
इस बार प्रशासन ने मेले में कई नई व्यवस्थाएं लागू कीं। बेहतर पार्किंग, सुगम दर्शन और यातायात प्रबंधन की वजह से श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिली। अधिकारियों ने पिछले साल के अनुभवों को ध्यान में रखते हुए कई सुधार किए, जिससे व्यवस्था पहले से बेहतर रही।
पार्किंग की बड़ी व्यवस्था
प्रशासन ने पहली बार मेले के दौरान पार्किंग की क्षमता बढ़ाकर करीब 40 हजार वाहनों तक कर दी। खाटूश्यामजी आने वाले सभी मुख्य रास्तों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई, जिससे जाम की समस्या काफी कम हो गई। श्रद्धालुओं ने इस व्यवस्था की सराहना करते हुए इसे आगे भी जारी रखने की मांग की।
दिव्यांगों के लिए विशेष सुविधा
मेले में दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए भी खास इंतजाम किए गए। स्वयंसेवकों की टीम ने उन्हें मंदिर तक पहुंचाने और दर्शन कराने में मदद की। इस सुविधा का लाभ 10 हजार से अधिक दिव्यांग भक्तों को मिला।
हाईटेक खोया-पाया केंद्र
इस साल मेले में खोया-पाया केंद्रों की संख्या 6 से बढ़ाकर 12 कर दी गई। यहां गुम हुई वस्तुओं जैसे मोबाइल, बैग या अन्य सामान की जानकारी बड़ी स्क्रीन पर दिखाई गई। इससे लोगों को अपना सामान ढूंढने में आसानी हुई। छोटे बच्चों के गुम होने की स्थिति में उन्हें परिवार से मिलाने के लिए अलग टीम भी तैनात रही।
बेहतर कनेक्टिविटी से नहीं लगा जाम
प्रशासन ने मेले से पहले खाटू आने वाले सभी रास्तों की मरम्मत करवाई। शाहपुरा और रेनवाल मार्ग को भी सुचारू रूप से चालू किया गया। इससे जयपुर और अन्य शहरों से आने वाले भक्तों को आने-जाने में आसानी हुई और पूरे मेले के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारू रही।
एप और क्यूआर कोड की सुविधा
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए श्याम सारथी ऐप को लगातार अपडेट किया गया। वहीं दर्शन के बाद पार्किंग तक पहुंचने के लिए कई स्थानों पर क्यूआर कोड लगाए गए, जिससे लोगों को रास्ता ढूंढने में मदद मिली और भीड़ प्रबंधन आसान हुआ।
कम समय में हुए दर्शन
बेहतर व्यवस्थाओं के कारण मेले के शुरुआती दिनों में भक्तों को करीब 2–3 किलोमीटर पैदल चलकर लगभग 45 मिनट में दर्शन हो गए। एकादशी के दिन भी श्रद्धालुओं को सिर्फ दो से तीन घंटे में दर्शन मिल गए, जबकि पिछले साल इसी दिन छह से आठ घंटे तक इंतजार करना पड़ता था।
प्रशासन, पुलिस और मंदिर कमेटी के बेहतर समन्वय के कारण इस बार मेले में पार्किंग, यातायात, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाएं, सफाई और रोशनी की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया। इसी वजह से लाखों श्रद्धालुओं को सुगम और सुरक्षित तरीके से दर्शन करने का अवसर मिला।
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